कोरोना संक्रमण के कारण बंद स्कूल-कॉलेज सोमवार से खुल गए। पहले दिन कुहांसे के बाद भी 9वीं से 12वीं के बच्चे स्कूल पहुंचे तो कई तरह की बंदिशों के साथ उन्हें कैंपस में प्रवेश दिया गया। शहर के निजी स्कूलों में मुख्य गेट पर ही मास्क पहनकर आए बच्चों को थर्मल स्क्रीनिंग व हाथों को सैनिटाइज कर एंट्री दी गई। कैंपस व क्लास रूम में भी दूरी बनाकर चलने व बैठने के निर्देश का पालन कराया गया। बावजूद इसके 9 माह बाद दोस्तों से मिलने और क्लास में साथ बैठ कर पढ़ाई करने की खुशी दिखी। औसत 15-20 प्रतिशत उपस्थिति रही। सनशाइन स्कूल में 800 में 150 बच्चे पहुंचे। सेंट जेवियर्स में सिर्फ 9वीं के छात्राें को प्रैक्टिकल के लिए बुलाया गया था। नॉर्थ पॉइंट, इंद्रप्रस्थ इंटरनेशनल स्कूल, डॉल्फिन आदि सीनियर स्कूल में भी यही स्थिति रही। प्रबंधकों ने कहा, अभी उपस्थिति से ज्यादा फोकस बच्चाें की सुरक्षा व एसओपी का पालन कर विद्यालय संचालन पर है। इसलिए स्कूल वाहन भी नहीं चलाए गए। कई स्कूल संचालकों ने कहा, ऑफलाइन के साथ कुछ दिनों तक ऑनलाइन क्लास भी चलती रहेगी। कई सरकारी स्कूलाें में सुबह मास्क नहीं पहुंचे। वहीं, एसओपी की अनदेखी कॉलेजों में भी दिखी। बिना मास्क के छात्र-छात्राएं कैंपस में दोस्तों के साथ दिखे। अनुपस्थित शिक्षकों से मांगा गया जवाब ब्लॉक रिसोर्स पर्सन से डीईओ तक शहर व ग्रामीण इलाके के स्कूलों का चक्कर लगाते रहे। एक-एक कर स्कूलों को मास्क उपलब्ध कराए गए। इस दौरान अनुपस्थित शिक्षकों से जवाब मांगते हुए चेतावनी दी गई। 9वीं से 12वीं तक के जिले में 1.58 लाख छात्र हैं, लेकिन बोर्ड व इंटर की परीक्षा के चलते 9वीं व 11वीं के ही आए। इसलिए उपलब्ध 56 हजार मास्क के अनुसार स्कूलों को कम मास्क मिले। कॉलेजों में बगैर मास्क फॉर्म भरने पहुंचे लंबे अंतराल के बाद सोमवार को कॉलेज भी खुल गए। स्नातक में अभी किसी सत्र की क्लास नहीं चल रही है, लेकिन पहले दिन पार्ट-टू का फॉर्म भरने के लिए छात्र-छात्राओं की भीड़ उमड़ पड़ी। इस दौरान अधिकांश मास्क में भी नहीं दिखे। दाखिले के बाद पहली बार इंटर के भी छात्र-छात्राएं आए थे। एमडीडीएम कॉलेज में कैंपस में लंबी लाइन लगी थी। बोले छात्र- दोस्तों से मिल नई ऊर्जा आई स्कूल आने से छात्रों की खुशी का ठिकाना न था। सनशाइन के छात्र राजन ने कहा, क्लास में पढ़ाई से नई ऊर्जा मिली। ऑनलाइन पढ़ाई से मन ऊब गया था। मुखर्जी सेमिनरी के रंजीत का कहना था कि घर में रहने से पढ़ाई ठप हाे गई थी। दोस्तों से मिलने का मौका मिला। जिला स्कूल में छात्रों ने दोस्तों के साथ मस्ती की। एमडीडीएम में इंटर में दाखिले के बाद पहली बार कॉलेज आईं छात्राओं ने सेल्फी ली। सरकारी स्कूल : बिना मास्क के क्लास में पहुंच गए बच्चे, शिक्षक ने कहा- मास्क मिले ही नहीं सुबह 10 बजे। बच्चे जिला स्कूल में गेट से घुसे और सीधे क्लास में बैठ गए। न चेहरे पर मास्क, न साेशल डिस्टेंसिंग। आधा दर्जन शिक्षक आए थे, किसी ने नहीं राेका। बाद में बच्चाें काे कैंपस में निकाल थर्मल स्क्रीनिंग की गई। जिनके चेहरे पर मास्क नहीं थे, उन्हें रूमाल बांधने काे कहा। बच्चे बाेले- मास्क लगाना भूल गए। शिक्षकाें ने कहा, विभाग ने मास्क उपलब्ध नहीं कराया। मुखर्जी सेमिनरी 1200 में 125 से 150 छात्र आए। साेशल डिस्टेसिंग का पालन कराया गया। प्राचार्य ने कहा, मास्क नहीं मिले। अपने स्तर से मास्क देकर बच्चाें काे क्लास में बैठाएंगे। चैपमैन में भी कमाेवेश एसओपी की अनदेखी दिखी। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today एमडीडीएम में प्रवेश के दौरान कतार में लगीं छात्राएं उत्साह से सराबोर। - VTM Breaking News

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Tuesday, January 05, 2021

कोरोना संक्रमण के कारण बंद स्कूल-कॉलेज सोमवार से खुल गए। पहले दिन कुहांसे के बाद भी 9वीं से 12वीं के बच्चे स्कूल पहुंचे तो कई तरह की बंदिशों के साथ उन्हें कैंपस में प्रवेश दिया गया। शहर के निजी स्कूलों में मुख्य गेट पर ही मास्क पहनकर आए बच्चों को थर्मल स्क्रीनिंग व हाथों को सैनिटाइज कर एंट्री दी गई। कैंपस व क्लास रूम में भी दूरी बनाकर चलने व बैठने के निर्देश का पालन कराया गया। बावजूद इसके 9 माह बाद दोस्तों से मिलने और क्लास में साथ बैठ कर पढ़ाई करने की खुशी दिखी। औसत 15-20 प्रतिशत उपस्थिति रही। सनशाइन स्कूल में 800 में 150 बच्चे पहुंचे। सेंट जेवियर्स में सिर्फ 9वीं के छात्राें को प्रैक्टिकल के लिए बुलाया गया था। नॉर्थ पॉइंट, इंद्रप्रस्थ इंटरनेशनल स्कूल, डॉल्फिन आदि सीनियर स्कूल में भी यही स्थिति रही। प्रबंधकों ने कहा, अभी उपस्थिति से ज्यादा फोकस बच्चाें की सुरक्षा व एसओपी का पालन कर विद्यालय संचालन पर है। इसलिए स्कूल वाहन भी नहीं चलाए गए। कई स्कूल संचालकों ने कहा, ऑफलाइन के साथ कुछ दिनों तक ऑनलाइन क्लास भी चलती रहेगी। कई सरकारी स्कूलाें में सुबह मास्क नहीं पहुंचे। वहीं, एसओपी की अनदेखी कॉलेजों में भी दिखी। बिना मास्क के छात्र-छात्राएं कैंपस में दोस्तों के साथ दिखे। अनुपस्थित शिक्षकों से मांगा गया जवाब ब्लॉक रिसोर्स पर्सन से डीईओ तक शहर व ग्रामीण इलाके के स्कूलों का चक्कर लगाते रहे। एक-एक कर स्कूलों को मास्क उपलब्ध कराए गए। इस दौरान अनुपस्थित शिक्षकों से जवाब मांगते हुए चेतावनी दी गई। 9वीं से 12वीं तक के जिले में 1.58 लाख छात्र हैं, लेकिन बोर्ड व इंटर की परीक्षा के चलते 9वीं व 11वीं के ही आए। इसलिए उपलब्ध 56 हजार मास्क के अनुसार स्कूलों को कम मास्क मिले। कॉलेजों में बगैर मास्क फॉर्म भरने पहुंचे लंबे अंतराल के बाद सोमवार को कॉलेज भी खुल गए। स्नातक में अभी किसी सत्र की क्लास नहीं चल रही है, लेकिन पहले दिन पार्ट-टू का फॉर्म भरने के लिए छात्र-छात्राओं की भीड़ उमड़ पड़ी। इस दौरान अधिकांश मास्क में भी नहीं दिखे। दाखिले के बाद पहली बार इंटर के भी छात्र-छात्राएं आए थे। एमडीडीएम कॉलेज में कैंपस में लंबी लाइन लगी थी। बोले छात्र- दोस्तों से मिल नई ऊर्जा आई स्कूल आने से छात्रों की खुशी का ठिकाना न था। सनशाइन के छात्र राजन ने कहा, क्लास में पढ़ाई से नई ऊर्जा मिली। ऑनलाइन पढ़ाई से मन ऊब गया था। मुखर्जी सेमिनरी के रंजीत का कहना था कि घर में रहने से पढ़ाई ठप हाे गई थी। दोस्तों से मिलने का मौका मिला। जिला स्कूल में छात्रों ने दोस्तों के साथ मस्ती की। एमडीडीएम में इंटर में दाखिले के बाद पहली बार कॉलेज आईं छात्राओं ने सेल्फी ली। सरकारी स्कूल : बिना मास्क के क्लास में पहुंच गए बच्चे, शिक्षक ने कहा- मास्क मिले ही नहीं सुबह 10 बजे। बच्चे जिला स्कूल में गेट से घुसे और सीधे क्लास में बैठ गए। न चेहरे पर मास्क, न साेशल डिस्टेंसिंग। आधा दर्जन शिक्षक आए थे, किसी ने नहीं राेका। बाद में बच्चाें काे कैंपस में निकाल थर्मल स्क्रीनिंग की गई। जिनके चेहरे पर मास्क नहीं थे, उन्हें रूमाल बांधने काे कहा। बच्चे बाेले- मास्क लगाना भूल गए। शिक्षकाें ने कहा, विभाग ने मास्क उपलब्ध नहीं कराया। मुखर्जी सेमिनरी 1200 में 125 से 150 छात्र आए। साेशल डिस्टेसिंग का पालन कराया गया। प्राचार्य ने कहा, मास्क नहीं मिले। अपने स्तर से मास्क देकर बच्चाें काे क्लास में बैठाएंगे। चैपमैन में भी कमाेवेश एसओपी की अनदेखी दिखी। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today एमडीडीएम में प्रवेश के दौरान कतार में लगीं छात्राएं उत्साह से सराबोर।

कोरोना संक्रमण के कारण बंद स्कूल-कॉलेज सोमवार से खुल गए। पहले दिन कुहांसे के बाद भी 9वीं से 12वीं के बच्चे स्कूल पहुंचे तो कई तरह की बंदिशों के साथ उन्हें कैंपस में प्रवेश दिया गया। शहर के निजी स्कूलों में मुख्य गेट पर ही मास्क पहनकर आए बच्चों को थर्मल स्क्रीनिंग व हाथों को सैनिटाइज कर एंट्री दी गई। कैंपस व क्लास रूम में भी दूरी बनाकर चलने व बैठने के निर्देश का पालन कराया गया। बावजूद इसके 9 माह बाद दोस्तों से मिलने और क्लास में साथ बैठ कर पढ़ाई करने की खुशी दिखी।

औसत 15-20 प्रतिशत उपस्थिति रही। सनशाइन स्कूल में 800 में 150 बच्चे पहुंचे। सेंट जेवियर्स में सिर्फ 9वीं के छात्राें को प्रैक्टिकल के लिए बुलाया गया था। नॉर्थ पॉइंट, इंद्रप्रस्थ इंटरनेशनल स्कूल, डॉल्फिन आदि सीनियर स्कूल में भी यही स्थिति रही। प्रबंधकों ने कहा, अभी उपस्थिति से ज्यादा फोकस बच्चाें की सुरक्षा व एसओपी का पालन कर विद्यालय संचालन पर है।

इसलिए स्कूल वाहन भी नहीं चलाए गए। कई स्कूल संचालकों ने कहा, ऑफलाइन के साथ कुछ दिनों तक ऑनलाइन क्लास भी चलती रहेगी। कई सरकारी स्कूलाें में सुबह मास्क नहीं पहुंचे। वहीं, एसओपी की अनदेखी कॉलेजों में भी दिखी। बिना मास्क के छात्र-छात्राएं कैंपस में दोस्तों के साथ दिखे।

अनुपस्थित शिक्षकों से मांगा गया जवाब

ब्लॉक रिसोर्स पर्सन से डीईओ तक शहर व ग्रामीण इलाके के स्कूलों का चक्कर लगाते रहे। एक-एक कर स्कूलों को मास्क उपलब्ध कराए गए। इस दौरान अनुपस्थित शिक्षकों से जवाब मांगते हुए चेतावनी दी गई। 9वीं से 12वीं तक के जिले में 1.58 लाख छात्र हैं, लेकिन बोर्ड व इंटर की परीक्षा के चलते 9वीं व 11वीं के ही आए। इसलिए उपलब्ध 56 हजार मास्क के अनुसार स्कूलों को कम मास्क मिले।

कॉलेजों में बगैर मास्क फॉर्म भरने पहुंचे

लंबे अंतराल के बाद सोमवार को कॉलेज भी खुल गए। स्नातक में अभी किसी सत्र की क्लास नहीं चल रही है, लेकिन पहले दिन पार्ट-टू का फॉर्म भरने के लिए छात्र-छात्राओं की भीड़ उमड़ पड़ी। इस दौरान अधिकांश मास्क में भी नहीं दिखे। दाखिले के बाद पहली बार इंटर के भी छात्र-छात्राएं आए थे। एमडीडीएम कॉलेज में कैंपस में लंबी लाइन लगी थी।

बोले छात्र- दोस्तों से मिल नई ऊर्जा आई

स्कूल आने से छात्रों की खुशी का ठिकाना न था। सनशाइन के छात्र राजन ने कहा, क्लास में पढ़ाई से नई ऊर्जा मिली। ऑनलाइन पढ़ाई से मन ऊब गया था। मुखर्जी सेमिनरी के रंजीत का कहना था कि घर में रहने से पढ़ाई ठप हाे गई थी। दोस्तों से मिलने का मौका मिला। जिला स्कूल में छात्रों ने दोस्तों के साथ मस्ती की। एमडीडीएम में इंटर में दाखिले के बाद पहली बार कॉलेज आईं छात्राओं ने सेल्फी ली।

सरकारी स्कूल : बिना मास्क के क्लास में पहुंच गए बच्चे, शिक्षक ने कहा- मास्क मिले ही नहीं

सुबह 10 बजे। बच्चे जिला स्कूल में गेट से घुसे और सीधे क्लास में बैठ गए। न चेहरे पर मास्क, न साेशल डिस्टेंसिंग। आधा दर्जन शिक्षक आए थे, किसी ने नहीं राेका। बाद में बच्चाें काे कैंपस में निकाल थर्मल स्क्रीनिंग की गई। जिनके चेहरे पर मास्क नहीं थे, उन्हें रूमाल बांधने काे कहा। बच्चे बाेले- मास्क लगाना भूल गए। शिक्षकाें ने कहा, विभाग ने मास्क उपलब्ध नहीं कराया।

मुखर्जी सेमिनरी 1200 में 125 से 150 छात्र आए। साेशल डिस्टेसिंग का पालन कराया गया। प्राचार्य ने कहा, मास्क नहीं मिले। अपने स्तर से मास्क देकर बच्चाें काे क्लास में बैठाएंगे। चैपमैन में भी कमाेवेश एसओपी की अनदेखी दिखी।



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