बाहर से आए 15 हजार स्किल्ड श्रमिकाें काे बियाडा अपने मुजफ्फरपुर के बेला स्थित औद्याेगिक क्षेत्र में राेजगार देगा। इन स्किल्ड श्रमिकाें काे काम ढूंढ़ने के लिए अब बाहर नहीं जाना पड़ेगा। यानी, राेजी भी
यहीं, राेटी भी यहीं। इसका एक फायदा यह भी हाेगा कि स्किल्ड श्रमिक की समस्या से जूझ रहे स्थानीय उद्याेगाें काे संजीवनीमिल जाएगी। वे क्वालिटी प्राेडक्ट देने के साथ-साथ बाजार की डिमांड के हिसाब से समय पर उपलब्ध भी करा सकेंगे। बियाडा के बेला औद्याेगिक क्षेत्र में 275 उद्योग चल रहे हैं जिनमें अभी करीब 10 हजार कामगार हैं। जाे जरूरत के हिसाब से सिर्फ 40 प्रतिशत हैं। इनमें 25 हजार तक काे काम मिल सकता है। जैसी जानकारी मिली है कि लाॅकडाउन में बाहर से लाैटे 30 हजार प्रवासी श्रमिकाें में करीब 18 हजार उद्याेग, टेलरिंग व अन्य मशीनी कार्याें में स्किल्ड हैं। ऐसे में इनमें से अधिकतर काे इन उद्याेगाें में राेजगार मिल जाएगा और यहां के उद्याेगाें की भी तस्वीर बदल जाएगी।
ऐसे में सरकार की पहल पर बियाडा ने इन्हें राेजगार देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। बियाडा और श्रमिक कदम बढ़ाएंगे तो उद्यमी भी मदद के लिए तैयार हैं। महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली, हरियाणा के उद्योगों में एडवांस टेक्नोलॉजी की मशीनें हैं। उन उद्याेगाें में काम कर लाैटे कामगारों के तजुर्बे और हुनर का उपयोग कर उत्पादन की क्षमता और क्वालिटी दोनों बढ़ाई जा सकेगी। एक स्किल्ड कामगार 2-3 अप्रशिक्षितों के बराबर काम कर सकता है। टाइम का लॉस कम होगा, बर्बादी कम होगी। उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, क्वालिटी बेहतर हाेगा।
लागत भी 20 प्रतिशत तक कम हो सकती है। सरकार के निर्देश पर उद्योग विभाग ने सभी उद्यमियों से हर तरह की जरूरत वाले कामगाराें का ब्याेरा मांगा है। इसके प्रारूप भी दिए गए हैं। बदले हालात में यह पहल उत्तर बिहार के औद्योगिक जगत में नई क्रांति ला सकती है। कच्चा माल, श्रम और बाजार तीनों हैं यहां उत्तर बिहार की समृद्धि उद्योगों से ही संभव है। इस क्षेत्र में विस्तार की भी पूर्ण संभावना है। कृषि व फल धारित अन्य उद्योग भी लग सकते हैं। इसके लिए कच्चा माल और श्रम दो प्रमुख चीजें हैं। दोनों यहां उपलब्ध हैं। बाजार भी बड़ा है। क्योंकि, बिहार में बड़ी आबादी है और उद्योग नहीं होने के कारण बाहर से मंगाए गए सामान की खपत होती है। अपने यहां उत्पादन हाेगा ताे जरूरत के सामान सस्ते और सुलभ भी हाेंगे।
कुछ स्तर पर सार्थक प्रयास न किए जाने के कारण अब तक उद्योगाें का विस्तार नहीं हुआ
- वर्षों से उद्यमी यहां सिंगल विंडो सिस्टम की मांग कर रहे, इससे उनकी समस्याओं का समाधान एक जगह होगा
- उद्योगों को 24 घंटे बिजली कम दर पर उपलब्ध होती रहे तो यहां भी कम लागत पर अच्छे प्रोडक्ट बन सकेंगे
- एक उद्योग के लिए 20 से 25 लाइसेंस लेने पड़ते हैं, जिससे उद्यमियाें के लिए संचालन करना मुश्किल हो रहा है।
10 हजार प्रवासी कामगारों को दक्षता के अनुसार काम देने की बनी रणनीति
प्रवासी कामगारों को उनकी दक्षता तथा कार्य करने की कुशलता के आधार पर रोजगार उपलब्ध कराए जाएंगे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से इसके संबंध में मिले निर्देश के अनुसार जिले में शुक्रवार काे विशेष रणनीति बनी। डीएम डाॅ. चंद्रशेखर सिंह ने क्वारेंटाइन सेंटरों में आने वाले प्रवासी मजदूरों की स्किल मैपिंग कराने के बाद शुक्रवार काे संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक की। कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित बैठक में उन्हाेंने जिले में अब तक आए करीब 10 हजार स्किल्ड श्रमिकाें काे रोज़गार दिलाने के लिए कहा।
कहा कि अकुशल मजदूरों काे मनरेगा व निर्माण कार्य में तथा कुशल श्रेणी के कामगारों काे उनकी शलता के अनुसार काम दिलाएं। साथ ही स्वरोजगार के इच्छुक लोगों को विभिन्न याेजनाअाें से अनुदानित दर पर ऋण देने के लिए महाप्रबंधक जिला उद्योग केंद्र काे ऑनलाइन आवेदन लेने के लिए कहा। साथ ही निजी उद्यमी व व्यवसाइयाें काे आवश्यकता के अनुसार कामगार उपलब्ध कराने के लिए उद्याेग विभाग द्वारा जारी विशेष पोर्टल पर निबंधन कराने का निर्देश दिया।
इस दाैरान डीडीसी उज्ज्वल सिंह ने लॉकडाउन की अवधि में 13,966 काे नए जॉब कार्ड उपलब्ध कराने तथा मनरेगा के तहत 10,043 योजनाओं में प्रतिदिन लगभग 48 हजार मजदूरों काे काम देने की जानकारी दी। बताया जीविका द्वारा 2,03,517 मास्क का निर्माण किया गया है, जिनमें 1,04,568 की बिक्री हाे चुकी है। बैठक में नगर आयुक्त मणेश मीणा, अपर समाहर्त्ता आपदा अतुल वर्मा समेत अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
श्रेणी के अनुसार प्रवासी मजदूरों काे मिलेगा काम
- अकुशल श्रेणी के मजदूर : मनरेगा और गृह निर्माण समेत निर्माण से जुड़े अन्य कार्यों में लगाया जाएगा।
- कुशल कामगार : कारपेंटर, कपड़ा सिलाई, ड्राइवर, इलेक्ट्रीशियन, पेंटर, राजमिस्त्री, टाइल्स कारीगर, वाहन मैकेनिक, सेल्समैन, कृषि आधारित यंत्र, प्रिंटिंग प्रेस।
- स्वराेजगार के इच्छुक : प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, मुख्यमंत्री अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति व अत्यंत पिछड़ी जाति उद्यमी योजना, मुद्रा योजना और अन्य से अनुदानित दर पर ऋण।
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