काेराेना वायरस के संक्रमण की राेकथाम के लिए किए गए लाॅकडाउन के दाे माह से अधिक बीत गए हैं। अगर विभाग सक्रिय हाेता ताे अब तक न केवल शहर की जर्जर सड़कें बल्कि बाइपास और सबाैर से रामजानीपुर के बीच एनएच की मरम्मत भी पूरी हाे जाती और लाॅकडाउन खत्म हाेने के बाद लाेगाें काे जर्जर सड़क से आवागमन में परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता। लेकिन विभाग की लापरवाही की वजह से जब तीन लाॅकडाउन की अवधि खत्म हाे गई ताे इस दिशा में पहल तेज की गई और अब जब लाॅकडाउन-4 की अवधि खत्म हाेने काे है ताे कुछ प्राेजेक्ट पर काम शुरू किया गया है। लेकिन अब भी जिस गति से काम चल रही है, उसे पूरा करने में डेढ़-दाे माह से अधिक लग जाने की संभावना है। ऐसी स्थिति में एक बार फिर बरसात का माैसम आजाएगा और फिर इंजीनियराें काे बहाना मिल जाएगा और फिर से काम बंद हाे जाएगा। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि कहीं इस बार भी लाेगाें काे जर्जर सड़क पर सफर करने काे विवश नहीं हाेना पड़े।
लाॅकडाउन में काम करने से ट्रैफिक से मिलती राहत
लाॅकडाउन की शुरुआती अवधि में काम शुरू हाेता ताे ट्रैफिक का दबाव नहीं रहता। एजेंसी काे राहत मिल सकती थी। अब जबकि देर से सबाैर से रामजनीपुर के बीच मरम्मत शुरू की गई है ताे लाॅकडाउन खत्म हाेने के बाद और अधिक वाहन का चलना शुरू हाे जाएगा और मरम्मत में बाधा आ सकती है। साथ ही काम के बीच गाड़ियां चलने से सड़क भी जल्द टूट जाएगी।
बाइपास : मरम्मत की गति है काफी धीमी
230 कराेड़ की लागत से बना बाइपास छह माह भी ठीक से नहीं टिका। जगह-जगह सड़क ध्वस्त हाे गई है। पहले बहाना बनाया गया कि लाॅकडाउन की वजह से निर्माण सामग्री बाहर से नहीं अा पा रही है। बाद में निर्माण सामग्री अा गई अाैर अब जाकर उसकी मरम्मत शुरू की गई है। अगर सही गति से काम चला ताे मरम्मत पूरा करने में 20 दिन से अधिक लग सकते हैं।
सबाैर-रामजानीपुर एनएच : देर से काम
सबाैर से रामजानीपुर के बीच 31 किलाेमीटर एनएच 41 कराेड़ की लागत से पिछले साल बना था। लेकिन यह भी कुछ दिनाें के बाद ही टूटने लगा। अब ताे इसकी हालत देखने से ऐसा लगा है कि वर्षाें से सड़क नहीं बनी है। इस सड़क की भी फिर से मरम्मत शुरू की गई है। अभी कहलगांव की तरफ से काम शुरू किया गया है। लेकिन इसे पूरा करने में दाे माह लग सकते हैं। विभाग इस प्रयास में है कि बरसात से पहले काम पूरा हाे जाए।
भाेलानाथ फ्लाईअाेवर डीपीअार में ही अटका
भाेलानाथ पुल के पास फ्लार्इअाेवर के निर्माण काे लेकर अब डीपीअार में ही मामला अटका हुअा है। हालांकि इसकी स्वीकृति मिल गई है। लेकिन अब तक इस दिशा में लाॅकडाउन के कारण इस दिशा में काेई ठाेस पहल नहीं की जा सकी है। नतीजा, यह है कि दक्षिणी क्षेत्र के लाेगाें की परेशानी इस बारिश के माैसम में भी हाेगी। जबकि अगर पुल निर्माण निगम की अाेर से ठाेस पहल की जाती ताे अब तक इसके निर्माण की दिशा में पहल तेज हाे जाती और इससे लाेगाें में उम्मीद जगने की संभावना थी।
उल्टा पुल : पहले काम हाेता ताे टिकती सड़क
करीब 70 लाख की लागत से उल्टा पुल की मरम्मत शुरू ताे हाे गयी है, लेकिन गाड़ियाें के तुरंत चलने से सड़क के फिर जल्द टूटने की आशंका है। पहले भी देखा गया है कि सड़क बनने के साथ ही गाड़ियाें के दबाव में टूट जाती है। लाॅकडाउन के दाैरान काम हाे जाता ताे सड़क ज्यादा दिन तक टिकती।
शहर की सड़कें : लॉकडाउन होते ही काम हाे गया बंद
जिले की सड़काें काे सड़क मरम्मत नीति में शामिल किया गया है। इसमें शहर की तीन सड़कें शामिल हैं। इनमें तिलकामांझी-बरारी, एसएम काॅलेज- मिरजानहाट और तिलकामांझी-कचहरी हाेते हुए नया बाजार से चंपानगर तक की सड़क शामिल है। इसके तहत आदमपुर के बीच पीसीसी सड़क बनी। इसे आगे भी बनानी है। लेकिन लाॅकडाउन हाेने के कारण विभाग ने काेई पहल ही नहीं की और सड़क की हालत खराब हाे गई है।
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