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Monday, June 01, 2020

पति की माैत के बाद अदौड़ियां बेच बच्चाें काे पढ़ाया, जॉब कर रहे बेटे की भी माैत, अब सिलाई कर जीविकोपार्जन कर रही है https://bit.ly/3dnvavH

बगहा के हनुमानगढ़ी की एक महिला रेणु के लिए विधवा और अशिक्षित होना कभी अभिशाप नहीं बना। यह पीएम नरेंद्र मोदी के स्वदेशी अपनाने और आत्मनिर्भर होने के के सपने को साकार कर रही है। सत्तू, पापड़, आचार व अदौड़ियां बनाकर बच्चों का पालन पोषण कर रही है। इतना ही नहीं बच्चो को पढ़ा लिखा कर काबिल भी बनाया है। हालाकि आत्मनिर्भर बनने में इन्हें कठीनाईयों के उस दौर से गुजरना पड़ा है। रेणु कुअर ने हार नहीं मानी, लगातार अपने व बच्चो के लिए दिन रात मेहनत करती रही। घरेलू खाद्य पदार्थ और सिलाई का काम घर की दहलीज के अंदर रहते हुए किया। घर में ही पापड़, सत्तू, अदौड़ी जैसे घरेलू खाद्य पदार्थ को अपनी जीविका का साधन बना लिया। इतना ही नहीं जब खाद्य सामग्रियों को बेचकर जरूरतें पूरी नहीं हो पाई तो सिलाई-बुनाई का काम शुरू किया।
20 साल पहले हो गई थी पति की मौत
रेणू कुअर के पति अनिल प्रसाद का देहांत 20 साल पहले हो गया। रेणू कुअर ने बताया कि उस वक्त इनकी गोद में चार छोटे बच्चे थे। एक दिन अचानक पति बीमार पड़े व दुनिया को छोड़ गए। परिवार का खर्च चलाने के लिए कोई पुरुष नहीं था। रेणू की साथ सिर्फ उनकी सास थीं उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी और अपनी अशिक्षा को अपने संघर्षों में बाधा बनने दिया। दिन रात मेहनत करती रही। अपने व अपने बच्चो के लिए काम करती रही।
किडनी की बीमारी के वजह से बेटे की हुई मौत
रेणु देवी दो कमरों के पुराने और जर्जर मकान में अपने दो बेटियों और एक बेटे के साथ रहती थी। संघर्षों के बीच ही उन्होंने अपने बड़े बेटे को पढ़ा-लिखाकर इस काबिल बनाया। बेटे की बैंक में सरकारी नौकरी लग गई। लेकिन एक बार फिर बदकिस्मती ने दस्तक दी। किडनी की बीमारी के वजह से बेटे की भी मौत हो गई। बावजूद इसके इनका हौसला नहीं टूटा। पढ़ाई के साथ बेटियों को भी हुनर सीखा दिया, ताकि वे भी अपने जीवन में आत्मनिर्भर रह सकें।



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After the husband's death, he taught the children selling Adodiya, also the son of the son who is doing the job, is now sewing and earning a living.


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