बिहार राज्य विद्यालय रसोईया संघ की बैठक रविवार को डुमरिया गांव के मध्य विद्यालय परिसर में संपन्न हुई। इस प्रखंड स्तरीय (बगहा - 1) बैठक के दौरान सरकार पर रसोइयों की उपेक्षा व शोषण करने का आरोप लगाते हुए अपनी मांगों से संबंधित कई प्रस्ताव पारित किए गए। संघ के उपाध्यक्ष रामाश्रय हाजरा ने गंभीर खुलासा किया कि क्वारेंटाइन सेंटर्स पर काम करने वाली प्रत्येक रसोइया को प्रतिदिन 280 रुपये के हिसाब से भुगतान करना है, परंतु उसमें भी कटौती की जा रही है।
इन्होंने कहा कि रसोईया खाना नहीं बना रहे हैं वहां हलवाई को 500 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान किया जा रहा है। ऐसे में रसोईया के प्रति सरकार की दोहरी नीति स्पष्ट दिख रही है। जिला संगठन मंत्री शंभूनाथ मिश्र व प्रखंड अध्यक्ष अशर्फी राम आदि संघ के नेताओं ने कहा कि सुबह से 10 बजे रात तक रसोइयों ने क्वारेंटाइन सेंटर्स पर पूरी निष्ठा के साथ अपनी सेवा दी है। संक्रमण के खतरों के बावजूद इनकी सेवा भावना कमजोर नहीं पड़ी। जबकि सरकार के स्तर पर रसोईयों की जांच नहीं कराई जा रही है।
संक्रमण से बचने के लिए कोई साधन भी इन्हें उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। संगठन के तमाम लोगों ने इसपर रोष व्यक्त किया। संगठन के लोगों ने सरकार से संक्रमण से बचाव के लिए दैनिक उपयोगी संसाधन उपलब्ध कराने की मांग की। साथ ही साथ सरकार से निर्धारित राशि को कटौती नही करने तथा ससमय भुगतान कराने की मांग से संबंधित प्रस्ताव भी पारित किए गए। प्रमिला देवी, हरेंद्र चौधरी, साहेब गोड़, गम्हा साह, सुभावती देवी, मीरा देवी समेत बड़ी संख्या में रसोइयों ने बैठक में अपनी सहभागिता निभाई।
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