नौजवानों एवं किसानों को स्वरोजगार देने के लिए माधोपुर विज्ञान केंद्र ने गोकुल मिशन योजना का शुभारंभ जोर शोर से शुरू कर दिया है । गायों को रखने के लिए भवनों का निर्माण शुरू किया गया है । यह जानकारी वैज्ञानिक डॉक्टर शिशिर कुमार गंगवार ने दी है। उन्होंने बताया कि इसके लिए माधोपुर विज्ञान केंद्र को चुना गया है। पशु चिकित्सा विज्ञान विभाग ने ऐसी परियोजना की शुरुआत की है। उन्होंने बताया कि इस काम के लिए विभाग ने 1 वर्ष में साढे छह करोड़ रुपए की स्वीकृति दी है।
हरियाणा व पंजाब से देसी नस्ल के 100 से 150 साहिवाल रेड डक्षसधी एवं गिर प्रजाति के गायों को रखा जाएगा। गिर प्रजाति के गाय गुजरात साहिवाल प्रजाति की गाय हरियाणा व पंजाब तथा रेड डक्षसधीगाय नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टीट्यूट करनाल से मंगाई जाएगी। इस देसी नस्ल की गाय 15 से 20 लीटर दूध प्रतिदिन देगी व 30 से 40 लीटर दूध के लिए 2 साल समय लगेंगे। इन विट्रो तकनीकी से प्रयोगशाला में ही सांड शुक्राणु व गाय के अंडाणु को को क्रास कराया जाएगा जिसके कारण गाय बछिया देगी। इसके लिए दो पशु चिकित्सक 3 तकनीकी सहायक सहित 50 टीम रहेगी जो पशुओं को देख रेख तथा पशुपालकों को भी जानकारी देंगे।
रामपुर नाका से मदनपुर माई स्थान तक हो रहे पथ निर्माण पर रोक
रामपुर नाका से मइनपुर माई स्थान मोड़ तक 7 किलोमीटर होने वाले सड़क निर्माण पर वन विभाग की ओर से रोक लगा दी गई है। वीटीआर ने सड़क की चौड़ाई बढ़ाये जाने पर आपत्ति जताया है। सड़क निर्माण पर रोक को हटाने के लिए राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल मोतिहारी के कार्यपालक अभियंता ने वन संरक्षक को पत्र लिखा है। वन संरक्षक को लिखे पत्र में कहा है कि नेशनल हाईवे 727 के 97 किलोमीटर से 104.20(रामपुर नाका से मदनपुर मोड) तक मजबूतीकरण कार्य प्रगति पर था।
इस कार्य की स्वीकृति सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ओर से दी गई है। जिसके अनुसार वर्तमान में 3.05 मीटर वाली सड़क के दोनों तरफ एक-एक मीटर चौकडीकरण कार्य के साथ मजबूतीकरण का कार्य किया जाना है। इस दौरान एक भी पेड़ को नहीं कटा गया है। लेकिन वन्यप्राणी (संरक्षण) अधिनियम का हवाला देकर कार्य को रोका गया है।
यह मार्ग पर्यटन को बढ़ावा देने में है अहम
एनएच के कार्यपालक अभियंता ने बताया कि एचएच-727 महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल वाल्मीकिनगर को जोड़ने वाला एक मात्र पथांश है। वीटीआर के मध्य पथ, जो काफी जर्जर स्थिति में है। उसकी चौड़ाई मात्र 3.05 मीटर रखना प्रासंगिक व जनहित में नहीं है। चौड़ीकरण को लेकर पूर्व में भी प्रस्ताव समर्पित वन संरक्षक को मिल चुका है।
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