कोरोना वायरस का प्रकोप धार्मिक कर्मकांड के साथ-साथ पर्व-त्योहार पर पड़ रहा हैं। 22 मई को सुहागिनों का महापर्व वट सावित्री पूजा हैं। लॉकडाउन के कारण सामूहिक पूजा को लेकर महिलाओं में संशय की स्थिति हैं। अधिकांश महिलाएं घर पर ही वट सावित्री पूजा की तैयारी कर रही हैं। पहली बार महिलाओं ने पांच से दस रुपए में पत्तों से लदी बरगद के पेड़ की टहनी खरीदी।
घर पर आकर मिट्टी के गमले में इस टहनी को रोपा। शुक्रवार को इसी वट वृक्ष के पास बैठ सुहागिनें पूजा पाठ करेंगी, साथ ही सावित्री सत्यवान की कथा का श्रवण करेगी। इधर वट सावित्री पूजा को लेकर खरीदारी के लिए महिलाओं की भीड़ बाजार में अच्छी-खासी देखने को मिली। मुख्य बाजार धामी टोला, जीबी रोड, टावर चौक सहित अन्य इलाके की दुकानें पूजन सामग्री से पटी रही।
बांस से निर्मित हाथ पंखा की खूब हुई खरीदारी: बांस से निर्मित हाथ पंखा से लेकर फल व डलिया की खरीदारी लोगों ने की। आचार्य नवीन चंद्र मिश्र वैदिक ने बताया कि लॉकडाउन में घर पर ही वट सावित्री पूजा करना सर्वोत्तम हैं। घर के गमले में वट वृक्ष का पौधा लगा जल, फूल व प्रसाद चढ़ाए, साथ ही वट वृक्ष में रक्षा सूत्र बांध पंखा करें। वट वृक्ष से पति की लंबी आयु की कामना करें। इसके बाद चना, शक्कर, पकवान, मिष्ठान प्रसाद के रूप में वितरण करें।
भक्तों के आग्रह पर सावित्री सत्यवान की ऑडियो कथा वायरल: आचार्य ने बताया कि लॉकडाउन के कारण सामूहिक पूजा में सुहागिनों की भीड़ कम होगी। घर पर महिलाएं विधिवत तरीके से पूजा संपन्न करे, इसके लिए सावित्री व सत्यवान की कथा का ऑडियो वायरल किया जा रहा है, ताकि वट वृक्ष की पूजा के बाद महिलाएं कथा का श्रवण कर सके। आचार्य ने बताया कि उन्होंने अपने यजमान के साथ-साथ कई भक्तों के पास वाट्सएप व अन्य सोशल साइट्स पर कथा को भेजा हैं। उन्होंने पूजा अर्चना के बाद ब्राह्मणों को सौभाग्य की सामग्री दान करने की अपील की।
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