तीन बच्चाें की दर्दनाक माैत से बेली राेड स्थित ललित भवन के पीछे की झुग्गी बस्ती गुरुवार को शोक में डूबी रही। इस माेहल्ले में करीब सौ परिवार रहते हैं। एक भी घर में चूल्हा नहीं जला। शाम होते ही माेहल्ले की औरतें घटनास्थल के पास ही धरने पर बैठ गईं।
कुछ देर बाद वहां मृत कुश की मां रूबी देवी भी आ गईं। वह बदहवास होकर मिट्टी पर लोटने लगीं। वह रोते-रोते कह रही थीं- ले जाओ अपना 4 लाख रुपया। हमको हमारा बेटा लौटा दो। देर शाम तक महिलाएं घटनास्थल पर जमी रहीं और कार्रवाई की मांग करती रहीं। महिलाओं के साथ पुरुष भी पोस्टर-बैनर के साथ आ गए।
ट्रैफिक पुलिस के जवानों के खिलाफ कार्रवाई की मांग
महिलाओं ने कहा कि कंस्ट्रक्शन कंपनी की लापरवाही से यह हादसा हुआ। हमलोग यहां स्लैब रखने से मना कर रहे थे। रखा भी तो उसे बैरिकेड नहीं किया। इसके अलावा ट्रैफिक के उन पुलिसकर्मियों पर भी कार्रवाई की मांग कर रही थीं जो सूचना मिलने पर भी मदद के लिए नहीं आए। बाद में पुलिस ने इन लोगों को समझा-बुझाकर वहां से हटाया।
घटनास्थल पर उस समय हृदयविदारक स्थिति उत्पन्न हो गई जब करण के पिता गणेश घर में रखे उसके बिस्किट और चिप्स लेकर बाहर दौड़ पड़े। वे घटनास्थल पर गए और जहां बच्चों का शव दबा था वहां चिप्स और बिस्किट रखने लगे। वहीं बैठकर रोने लगे। लोग समझा-बुझाकर उन्हें घर ले गए।
27 जुलाई को होता करण का बर्थडे, खरीद कर रखे सूट को गले से लगा रोती रही मां
माेहल्ले से दिनभर रह-रहकर महिलाओं के चीखने-चिल्लाने की आवाज आती रही। तीनों बच्चाें केशव उर्फ कुश, करण और साहिल के मां-पिता का तो बुरा हाल था। तीनों की मां को तो होश ही नहीं था कि कौन आ-जा रहा है। उनके पिता का भी रो-रोकर बुरा हाल था। दो महीने बाद 27 जुलाई को करण का बर्थडे था। उसकी मां रूबी देवी ने उसके लिए पहले से ही सूट खरीदकर रखा था। बच्चे के सूट को गले लगाकर करण की मां दहाड़ मारकर रोने लगीं। पास में ही बेसुध पड़े उसके पिता गणेश पासवान एकटक बेटे की तस्वीर को निहारते रहे।
केशव उर्फ कुश की मां रूपा देवी बार-बार बेहोश हो जा रही थीं। कुश की बहन बोली-27 अप्रैल को हमने भाई का बर्थडे मनाया था। कहा था कि लॉकडाउन खुलने के बाद केक अलग से काटेंगे। क्या पता था कि अब भाई हमेशा के लिए हमें छोड़ कर चला जाएगा। इधर शास्त्रीनगर थाने में यूडी केस दर्ज कर लिया गया है। जिला प्रशासन की जांच रिपोर्ट के बाद दोषियों पर भी मामला दर्ज होगा।
दो बच्चों के शव गंगा में प्रवाहित, साहिल काे दफनाया गया
बच्चों के पोस्टमार्टम के बाद उनका शव सभी के परिजनों को सौंप दिया गया। गुरुवार की सुबह शव के आते ही माेहल्ले में चीख-पुकार मच गई। महिलाओं की स्थिति खराब होते देख माेहल्ले के पुरुष बिना देर किए सुबह में ही करण और कुश के शव को लेकर दीघा गंगा घाट चले गए। वहां दोनों के शव को विधि विधान के साथ गंगा में प्रवाहित कर दिया गया। वहीं महुला से साहिल के परिजनों के आने के बाद उसके शव को दफनाया गया। साहिल की मां नजमा खातून अपने इकलौते बच्चे के जाने के गम में बार-बार बेहोश जा रही थीं। होश आते ही कहतीं-कितनी मिन्नतों के बाद अल्लाह ने चराग दिया था, वो भी छीन लिया।
लापरवाही बदस्तूर जारी, नहीं किया गया बैरिकेड
इतनी बड़ी घटना होने के बाद भी गुरुवार को उस जगह को बैरिकेट नहीं किया गया। उधर लोगों के आवाजाही को बंद नहीं कराया गया। हालांकि एहतियात के तौर पर स्थानीय थाना के साथ साथ अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती कर दी गई थी। शास्त्रीनगर के प्रभारी थानेदार, कई दरोगा के साथ साथ पुलिस लाइन से भी टीम देर रात तक मौके पर बनी रही।
जांच के लिए एसडीओके नेतृत्व में जांच टीम गठित
बेली रोड पर ललित भवन के पास बुधवार शाम हुए दर्दनाक हादसे की जांच शुरू हो गई है। गुरुवार को एसडीओ के नेतृत्व में गठित जांच टीम में शामिल पुल निर्माण निगम की टेक्निकल टीम ने स्थल निरीक्षण किया। यह टीम अपनी रिपोर्ट सदर एसडीओ तनय सुल्तानिया को सौंपेगी। इधर, एसडीओ ने पीड़िताें के साथ हादसा के समय उपस्थित लोगों का बयान लेना शुरू कर दिया है।
पता लगाया जा रहा है कि क्या निर्माण सामग्री रखने में लापरवाही बरती गई? यदि लोहिया पथ चक्र का कार्य करने वाली एजेंसी की लापरवाही सामने आती है तो उस पर कार्रवाई होगी। डीएम कुमार रवि ने कहा कि हादसे की जांच के लिए एसडीओ के नेतृत्व में जांच टीम गठित की गई है। दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस हादसे में तीन बच्चाें की माैत हाे गई थी।
शहर की अन्य परियोजनाओं की भी हो रही मॉनिटरिंग
शहर के अन्य इलाकों में सड़क को खोदकर निर्माण कार्य चल रहा है। इसमें फ्लाईओवर, नमामि गंगे, गैस पाइपलाइन सहित अन्य परियोजनाएं शामिल हैं। इन परियोजनाओं पूरा करने के लिए सड़क पर जगह-जगह गड्ढा खोदा गया है। बारिश के दौरान होने वाले हादसे को रोकने के लिए उससे पहले सड़काें काे दुरुस्त करना है। डीएम ने कहा कि शहर में चल रही परियोजनाओं की मॉनिटरिंग के लिए टीम गठित की गई है। किसी भी जगह एजेंसियों के द्वारा हादसे में परिवर्तित होने वाली लापरवाही मिलने पर कार्रवाई की जाएगी ताकि हादसे की अाशंका नहीं रहे।
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