बाहर से लौटे प्रवासी मजदूरों के सेहत से प्रशासन द्वारा खिलवाड़ किया जा रहा है। जिससे मजदूर अब परेशान हो चुके हैं। बीते 19 मई को प्रखंड के संग्रामपुर पंचायत स्थित शिवडीह गांव में 30 लोग पंजाब से लौटे थे। मजदूर वापस आने के बाद इसकी सूचना स्थानीय प्रशासन को दी गई थी। लेकिन किसी ने भी उन मजदूरों की खबर नहीं ली। अब तक उन लोगों का स्वास्थ्य जांच भी नहीं हुआ है। थक हार कर उन मजदूरों ने गांव से एक किलोमीटर दूर भरार पहाड़ के किनारे तंबू लगा कर रहना शुरू कर दिया है।
मजदूरों का आरोप है कि बाहर से वापस आए चार दिन से ज्यादा हो गया है। आने के बाद ये लोग कई क्वारेंटाइन सेंटर पर भी गए। लेकिन किसी जगह उनका रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है, यह कह कर उन्हें वापस भेज दिया गया। वही दूसरी तरफ कोरोना संक्रमण का असर घर-परिवार पर नहीं पड़े इसके लिए ये प्रवासी गांव से बाहर ही रह रहे हैं। हालांकि परेशानी यह है कि यहां रह रहे प्रवासियों के लिए खाना उनके घरों से ही आता है। ऐसे में रोजाना ये लोग परिजनों के संपर्क में आ ही जाते हैं।
मजदूरों ने बताया कि गांव से बाहर कुछ घटना होने का भी डर लग रहा है। लेकिन अपने घर परिवार को बचाने के लिए यह कष्ट उठाना उनकी मजबूरी है। शनिवार को पंचायत के मुखिया उमेश महतो मजदूरों से मिलने पहुंचे और सहायता करने का भरोसा दिलाया। मुखिया उमेश महतो ने कहा कि मजदूरों की आने की सूचना तथा मजदूरों की तत्कालीन स्थिति से सीओ को अवगत करा दिया गया है। बावजूद अभी तक उन लोगों की मदद नहीं की जा रही है।
प्रवासियों ने जांच को ले लगाई गुहार
क्वारेंटाइन सेंटर पर सुरक्षा किट तो दूर बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं कराई जा सकी हैं। प्रवासी मजदूरों ने बताया कि लहसोरबा विद्यालय के क्वारेंटाइन सेंटर में 9 महिलाएं, 13 बच्चे सहित 82 प्रवासी मजदूर रह रहे हैं। सेंटर पर आए लगभग 7 दिन बीत चुका है, लेकिन अब तक डिग्निटी किट का वितरण तो दूर एक दिन भी जांच तक नहीं की गई है। कई बार स्वास्थ्य जांच कराने की गुहार लगाई, लेकिन अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं।मजदूरों ने बताया कि खाने-पीने की कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन स्वास्थ्य जांच नहीं होने से सभी आशंकित हैं।
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