सोन नदी में खुलेआम अवैध खनन और नाव के माध्यम से अंतरराज्यीय बालू तस्करी के बारे में दैनिक भास्कर के कवरेज के बाद खनन विभाग ने बुधवार को बहुत बड़ा एक्शन लिया। इसके लिए खनन विभाग की टीम पुलिस के साथ सुबह 5 बजे ही नदी में उतर गई और छापेमारी शुरू कर दी। दोपहर 12 बजे तक खनन विभाग ने पुलिस की मदद से चांदी थाना से लेकर नदी मार्ग में सारण जिले के डोरीगंज सीमा बिंदगांवा तक छापेमारी अभियान चलाया।

इस क्रम में अवैध खनन गिरोह व तस्करी गिरोह से जुड़े पटना, सारण, बेगूसराय, लखीसराय, मुजफ्फरपुर, वैशाली, सीवान, बक्सर और भागलपुर जिले के 72 लोगों को गिरफ्तार किया। इनमें एक नाव मालिक, पांच नाविक व 66 अवैध बालू खनन और लदान करने वाले मजदूर हैं। सभी को जेल भेज दिया गया।
उधर,छापेमारी के दौरान खनन विभाग और पुलिस को देखते ही सोन नदी में मौजूद दर्जनों नावें और तस्करी गिरोह से जुड़े लोग पटना जिला और सारण जिला के बॉर्डर एरिया में भाग गये। इससे खनन विभाग और पुलिस उन्हें नहीं पकड़ पायी। खनन विभाग के सहायक निदेशक प्रमोद कुमार ने बताया कि अवैध खनन और बालू परिवहन में शामिल होने का आरोप में 72 लोगों के खिलाफ एफआईआर कराई है। 30 सितम्बर तक बालू उत्खनन पर रोक है।
7 घंटे तक कार्रवाई
खनन विभाग और जिले की पुलिस टीम ने सुबह पांच से दोपहर 12 बजे तक यानी लगातार सात घंटे तक सोन नदी के घाटों को खंगाला और खनन में शामिल अवैध तस्करों को सलाखों के पीछे भेजा।
बाहर से आते हैं मजदूर
गिरफ्तारी के बाद मजदूरों ने पुलिस के सामने कई खुलासे किए। गिरफ्तार किए गए मजदूरों ने पुलिस को बताया कि वे लोग भोजपुर के नहीं हैं। अधिक रुपये कमाने की लालच से दूसरे जिलों से आए हैं।
हर रात आती हैं नावें
लाल बालू की खनन का काला खेल हर रात को होता है। रात को दूसरे जिलों से नाविक अपनी नावें लेकर यहां आते हैं और घुप्प अंधेरे में बालू की अवैध खनन कर प्रशासन के आंखों में धूल झोंकते हैं।
गिरफ्तारी के बाद मजदूरों ने कहा- 600-1000 रुपए देते हैं तस्कर
गिरफ्तार 72 लोगों में पटना, बेगूसराय, लखीसराय, मुजफ्फरपुर, वैशाली, सारण, भागलपुर व सिवान जिले के हैं। इन्होंने बताया कि कि डोरीगंज पहुंचकर नावों पर मजदूरी करते हैं। इससे प्रतिदिन 600 से 1000 रुपया कमा लेते हैं। गिरफ्तार मोहन कुमार, गणेश महतो, जुगेश्वर महतो, अजय महतो, मिथलेश कुमार, मिथुन महतो, प्रदीप महतो, टुनटुन महतो, राजीव महतो, धर्मेंद्र महतो, मदन महतो, संजीव कुमार, नन्दलाल कुमार, भुनेश्वर साहनी ( सभी खुसरूपुर, पटना) के हैं। विरंजन कुमार, बहादुर सिंह, दीपनारायण सिंह, शम्भू कुमार, लालबाबू मुखिया, जयप्रकाश मुखिया, दुदेश्वर साहनी, मिथुन कुमार, राजकुमार, जितेंद्र, रामेश्वर महतो, अर्जुन, विकास, रामकुमार, (सभी बरियारपुर, मुजफ्फरपुर) के हैं। रंजीत पासवान, टेनी महतो, पवन कुमार, बसन्त महतो, रमेश महतो, रविन्द्र, ननकी महतो, राजाबाबू, राजीव महतो, हरेराम कुमार, रामानन्द, रंजीत राय, राममूर्ति, मनोज बिंद, कुंदन (सभी बछवाड़ा, बेगूसराय) के हैं। राजकुमार, राजाराम, रवि कुमार, भरत, टेकलाल भगत, सोमर भगत, महेश भगत (सभी मेदनी चौक, लखीसराय) के रहने वाले हैं। सनोज कुमार, मनोज महतो, पंकज महतो (भागलपुर) सुनील कुमार, अर्जुन सिंह, बालेन्द्र साहनी, राजीव कुमार, विजय साहनी, लालबाबू सिंह, सुनील पासवान, अर्जुन साहनी, कुलदीप सिंह (वैशाली), देवबचन साहनी, भीम यादव, टुनटुन राय, सोनू साहनी, किशोर साहनी (सारण) रंजीत कुमार, (सिवान) टुनटुन बिंद (रघुनाथपुर) को गिरफ्तार किया गया। सभी को जेल भेजा गया।
रात में खनन के बाद छपरा के रास्ते होती है अंतरराज्यीय बालू तस्करी
हर रात करीब दो हजार से अधिक नावें सारण और पटना जिले के जलमार्ग से सोन नद में प्रवेश करती हैं। इसके बाद सारण जिले के डोरीगंज से भोजपुर जिले के संदेश थाना क्षेत्र तक खुलेआम अवैध खनन और बालू तस्करी में जुट जाते हैं। यह अवैध धंधा शाम से सुबह तक अधिक होता है। सुबह सूर्योदय के पहले सभी नावें सारण और पटना जिला के रास्ते उत्तर प्रदेश, वैशाली, मुजफ्फरपुर, बेगूसराय, लखीसराय, बेगुसराय, भागलपुर लौट जाती हैं।
पटना और छपरा बॉर्डर का फायदा उठा भागे तस्कर
सोन नदी के पूरब दिशा में पटना जिला और उत्तर दिशा में सारण जिला का बॉर्डर है। बुधवार की सुबह छापेमारी के वक्त इन गिरफ्तार लोगों के अलावे दर्जनों नावें और लोग सोन नदी में मौजूद थे। दूर सेे ही छापामारी होते देख यह सभी पटना जिला और सारण जिला के बॉर्डर एरिया में भाग गए। जिससे इनकी गिरफ्तारी और नाव जब्ती नहीं हो सकी।
वर्चस्व ऐसा कि छापेमारी के बाद भी नहीं डरे तस्कर
8 सितंबर को भोजपुर के एसपी हरकिशोर राय के नेतृत्व में भी सोन नदी में छापेमारी अभियान चलाया गया था। इस दौरान एसपी ने खुद बालू घाटों पर जाकर छापेमारी की भी, लेकिन उसके बाद भी अवैध खनन चलता रहा और तस्कर पुलिस को धोखा देते रहे।
बड़ा सवाल: बिना प्रशासन के सहयोग से नहीं रुकेगी अवैध बालू तस्करी
छापेमारी में शामिल एक सरकारी सेवक ने बातचीत में कई चौंकाने वाली बातें कहीं। नाम नहीं छापने के भरोसा देने पर उन्होंने बताया कि छापेमारी में डर लगता है। पुलिस की कम संख्या रहती है। जबकि अवैध खनन में शामिल लोगों की सैकडो़ं संख्या होती है। डर लगता है हमला होने पर क्या किया जाएगा ? डर लगता है कि मॉब घेर लेने पर क्या करेंगे ? अधिकांश नावें सारण और पटना तरफ से आती हैं।छापेमारी होने पर नाव वाले पटना और सारण जिला के बॉर्डर में घुस जाते हैं। अगर सारण जिला से नाव का भोजपुर में प्रवेश रोक दिया जाए, पटना जिला से भी कार्रवाई हो, तो अवैध खनन और बालू तस्करी रुक सकता है।
अंतरजिला बालू तस्करों का अड्डा बना डोरीगंज का इलाका
अंतर्जिला बालू तस्करों का अड्डा सारण जिले का डोरीगंज का इलाका बन गया है। जहां दिन रात सारण, पटना, बेगूसराय, मुजफ्फरपुर, लखीसराय, वैशाली जिले के बालू तस्करों, नाव मालिकों और मजदूरों का जमावड़ा लगा रहता है। यहां विभिन्न जिले के छंटे हुए अपराधी भी पनाह लेते हैं। दिन भर शराब और कबाब का दौर चलता है। दिन में कुछ प्रतिशत ही नावें में अवैध खनन के लिए कोईलवर जाती हैं। अधिकांश शाम होने का इंतजार किया जाता है।
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