एकंगसराय में प्रवासी महिला मंगलवार को पॉजिटिव पाई गई। इसके साथ ही जिले में संक्रमितों की संख्या 112 हो गई, जिसमें 84 लोग ठीक हो चुके हैं। इधर, पावापुरी मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान सुबह में नवादा से आए कोरोना संदिग्ध एक मरीज की मौत हो गई। मृतक नवादा जिला के जमुआवां गांव निवासी परमेशवर महतो का 35 वर्षीय पुत्र रंजीत महतो कुछ दिन पहले हरियाणा से लौटा था। मृतक के ससुर ने बताया कि हरियाणा में ठेला पर गोलगप्पा बेचने का काम करता था।
लॉकडाउन के कारण कुछ दिन पूर्व अपने गांव क्वारेंटाइन सेंटर में रह रहा था। सोमवार को अचानक उसकी तबियत खराब हुई। इसके बाद विम्स में इलाज के लिए लाया गया। जहां उसकी मौत हो गई। मौत के बाद मृतक के साथ-साथ उसके संपर्क में आने वाले चार अन्य सदस्यों का भी सैम्पल लिया गया है। लेकिन मृतक की ट्रुनेट जांच में रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आयी है। कन्फर्मेशन के लिए सैम्पल पटना भेजा गया। कन्फर्मेशन रिपोर्ट आने तक शव को विम्स में रखा गया है। वहीं परिवार के सदस्यों की रिपोर्ट नहीं आई है। मोबाइल रिसीव नहीं होने से इस संबंध में सुप्रीटेंडेंट से विस्तार से जानकारी नहीं मिल सकी।
बरती जा रही लापरवाही
संदिग्ध की रिपोर्ट अगर पॉजिटिव आती है तो कोरोना यह दूसरी मौत होगी। पूर्व में अस्थवां प्रखंड में दिल्ली से आए प्रवासी की मौत कोरोना से हो गई थी। इसके बावजूद विम्स प्रशासन द्वारा सुरक्षा में लापरवाही बरती जा रही है। सूत्रों की मानें तो नवादा से आने वाले मरीज रेड जोन से आया था। वह क्वारेंटाइन सेंटर में रह रहा था। जानकारी के बावजूद जेनरल आईसीयू में भर्ती किया गया। बिना सुरक्षा किट के चिकित्सक व कर्मी उसका इलाज कर रहे थे। पूर्व में भी नालंदा के मरीज की कोरोना से मौत के बाद स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा सुरक्षा पर सवाल उठाया गया था। लेकिन विम्स प्रशासन द्वारा नजरअंदाज कर दिया गया।
दहशत के साए में स्वास्थ्यकर्मी
विम्स में लगातार हो रही मौतों के कारण डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी दहशत के साए में काम कर रहे हैं। कर्मियों ने बताया कि सुरक्षा को लेकर प्रबंधन से गुहार लगाने के बाद भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। पूर्व में भी सैम्पल लेने के साथ-साथ क्वारेंटाइन की मांग की थी। जिस पर विचार नहीं हुआ। अब भगवान भरोसे ड्यूटी कर रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग को संक्रमण फैलने की चिंता सता रही
सीएस डॉ. राम सिंह ने बताया अनलॉक 1.0 में कोरोना जैसी महामारी में बरती जा रही लापरवाही से स्वास्थ्य विभाग में कोरोना फैलने की चिंता बढ़ गई है। चेतावनी के बाद भी लोगों का मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग की अनदेखी चिंता का कारण है। सावधानी नहीं बरती गई तो कोरोना को सामुदायिक स्तर पर फैलने से कोई नहीं रोक सकता। होम क्वारेंआइन में रहने वाले प्रवासी भी नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। सर्वे के दौरान कई लोग घर व गांव से फरार पाए जा रहे हैं। अगर होम क्वारेंटाइन में रहने वाले प्रवासियो में पॉजिटिव केस मिलना शुरू हो गया तो बहुत बड़ी आफत आ सकती है।
मास्क कल्चर को अपनाकर जीत सकते हैं कोरोना से जंग
सीएस ने बताया कि कोरोना से जंग जीतने के लिए मास्क कल्चर को अपनाना बहुत जरूरी है। एक सर्वे के अनुसार अगर सावधानी नहीं बरती गई तो बिहार में 3 लाख लोग कोरोना संक्रमण के शिकार होंगे। वहीं सिर्फ मास्क लगाना अनिवार्य कर दिया जाए तो मात्र 10 हजार लोग संक्रमित होंगे। इसलिए बाहर निकलते समय या आपस में बातचीत के दौरान मास्क का प्रयोग आवश्य करें। इसके अलावा होम क्वारेंटाइन में रहने वाले लोगों पर परिवार के साथ-साथ आसपास के लोग भी ध्यान दें।
होम क्वारेंटाइन में326 का पता गलत
डीआईओ डॉ. अरूण कुमार सिन्हा ने बताया अब तक 16 हजार 256 घरों का स्क्रींनिंग किया गया। जिसमें 15 हजार 506 लोग होम क्वारेंटाइन का अनुपालन कर रहे हैं। 288 लोग घर से गायब पाए गए। 326 लोगों का पता ही गलत पाया गया है। 110 लोग क्वारेंटाइन का अनुपालन नहीं कर रहें हैं और 23 लोग गांव से बाहर चले गए हैं।
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