विगत दो दिनों से रुक-रुक कर हो रही बारिश ने मानसून आने की दस्तक दे दी है। मानसून का बेसब्री से इंतजार कर रहे क्षेत्र के किसानों के चेहरे खिल उठे हैं। शुक्रवार और शनिवार को हुए बारिश के कारण जहां मौसम में हुए बदलाव से आम लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली है तो वहीं, किसान धान की खेती को लेकर तैयारी में जुट गए हैं। बरबीघा प्रखंड के विभिन्न पंचायतों के किसान धान के बिचड़ों की बुआई के लिए खेतों को तैयार करने में जुट गए हैं। किसान शंभू सिंह, धर्मराज कुमार, अजय सिंह आदि ने बताया कि वैसे तो बिचड़ों की बुवाई का समय 15 मई से ही शुरू हो जाता है लेकिन इस बार मानसून में हुई देरी के कारण किसानों को काफी परेशानी हुई है। कुछ किसानों ने बोरिंग से पानी करके बुआई की थी लेकिन पर्याप्त पानी की कमी और भीषण गर्मी के कारण पौधे सूखने लगे थे। हालांकि मौसम में हुए बदलाव से काफी फायदा होगा। धान बिचड़ा पानी नहीं हो पाने की वजह से धूप में जल रहा था। लेकिन अब धान के बिचड़े को कोई नुकसान नहीं होगा। बड़े पैमाने पर होती है क्षेत्र में धान की खेती : बरबीघा प्रखंड के सभी 10 पंचायतों में बड़े पैमाने पर किसानों द्वारा धान की खेती की जाती है।हालांकि पिछले के वर्षों से पर रहे सुखाड़ के कारण किसानों के चेहरे पर इस बार भी चिंता की रेखाएं साफ देखी जा सकती। मुख्य रूप से खेती पर निर्भर हजारों किसान बारिश नहीं होने से किसान काफी परेशान होते है। किसानों के लिए वरदान अपर सकरी नहर में भी पर्याप्त पानी नहीं आ पाता है इस कारण धान के फसल पर इसका प्रतिकूल असर पड़ता है। हालांकि मौसम में बदलाव के बाद किसानों को उम्मीद जगी है कि अब लगातार बारिश होगी। किसानों ने बारिश नहीं होने पर पम्प सेट की सहायता से पटवन कर धान का बिचड़ा खेतों में गिराना शुरू किया था जो सिलसिला अभी तक जारी है। किसानों का कहना है कि अब अगर लगातार बारिश नहीं होती है तो किसानों को इस बार भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इस संबंध में कृषि समन्वयक राजेश कुमार ने बताया कि धान के बिचड़ो की बुआई का सही समय 15 मई से 15 जून निर्धारित किया गया है। लेकिन किसान 30 मई तक वैसे धान के बिचड़ों की बुआई कर सकते हैं जिसकी फसल 3 महीने से कम अवधि में तैयार हो जाते हैं। हालांकि उन्होंने बताया कि अगर 30 जून तक लगातार बारिश नहीं होती है तो धान की खेती इस बार प्रभावित हो सकती है। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today Monsoon knock, farmers engaged in sowing of rice paddy - VTM Breaking News

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विगत दो दिनों से रुक-रुक कर हो रही बारिश ने मानसून आने की दस्तक दे दी है। मानसून का बेसब्री से इंतजार कर रहे क्षेत्र के किसानों के चेहरे खिल उठे हैं। शुक्रवार और शनिवार को हुए बारिश के कारण जहां मौसम में हुए बदलाव से आम लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली है तो वहीं, किसान धान की खेती को लेकर तैयारी में जुट गए हैं। बरबीघा प्रखंड के विभिन्न पंचायतों के किसान धान के बिचड़ों की बुआई के लिए खेतों को तैयार करने में जुट गए हैं। किसान शंभू सिंह, धर्मराज कुमार, अजय सिंह आदि ने बताया कि वैसे तो बिचड़ों की बुवाई का समय 15 मई से ही शुरू हो जाता है लेकिन इस बार मानसून में हुई देरी के कारण किसानों को काफी परेशानी हुई है। कुछ किसानों ने बोरिंग से पानी करके बुआई की थी लेकिन पर्याप्त पानी की कमी और भीषण गर्मी के कारण पौधे सूखने लगे थे। हालांकि मौसम में हुए बदलाव से काफी फायदा होगा। धान बिचड़ा पानी नहीं हो पाने की वजह से धूप में जल रहा था। लेकिन अब धान के बिचड़े को कोई नुकसान नहीं होगा। बड़े पैमाने पर होती है क्षेत्र में धान की खेती : बरबीघा प्रखंड के सभी 10 पंचायतों में बड़े पैमाने पर किसानों द्वारा धान की खेती की जाती है।हालांकि पिछले के वर्षों से पर रहे सुखाड़ के कारण किसानों के चेहरे पर इस बार भी चिंता की रेखाएं साफ देखी जा सकती। मुख्य रूप से खेती पर निर्भर हजारों किसान बारिश नहीं होने से किसान काफी परेशान होते है। किसानों के लिए वरदान अपर सकरी नहर में भी पर्याप्त पानी नहीं आ पाता है इस कारण धान के फसल पर इसका प्रतिकूल असर पड़ता है। हालांकि मौसम में बदलाव के बाद किसानों को उम्मीद जगी है कि अब लगातार बारिश होगी। किसानों ने बारिश नहीं होने पर पम्प सेट की सहायता से पटवन कर धान का बिचड़ा खेतों में गिराना शुरू किया था जो सिलसिला अभी तक जारी है। किसानों का कहना है कि अब अगर लगातार बारिश नहीं होती है तो किसानों को इस बार भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इस संबंध में कृषि समन्वयक राजेश कुमार ने बताया कि धान के बिचड़ो की बुआई का सही समय 15 मई से 15 जून निर्धारित किया गया है। लेकिन किसान 30 मई तक वैसे धान के बिचड़ों की बुआई कर सकते हैं जिसकी फसल 3 महीने से कम अवधि में तैयार हो जाते हैं। हालांकि उन्होंने बताया कि अगर 30 जून तक लगातार बारिश नहीं होती है तो धान की खेती इस बार प्रभावित हो सकती है। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today Monsoon knock, farmers engaged in sowing of rice paddy

विगत दो दिनों से रुक-रुक कर हो रही बारिश ने मानसून आने की दस्तक दे दी है। मानसून का बेसब्री से इंतजार कर रहे क्षेत्र के किसानों के चेहरे खिल उठे हैं। शुक्रवार और शनिवार को हुए बारिश के कारण जहां मौसम में हुए बदलाव से आम लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली है तो वहीं, किसान धान की खेती को लेकर तैयारी में जुट गए हैं। बरबीघा प्रखंड के विभिन्न पंचायतों के किसान धान के बिचड़ों की बुआई के लिए खेतों को तैयार करने में जुट गए हैं।

किसान शंभू सिंह, धर्मराज कुमार, अजय सिंह आदि ने बताया कि वैसे तो बिचड़ों की बुवाई का समय 15 मई से ही शुरू हो जाता है लेकिन इस बार मानसून में हुई देरी के कारण किसानों को काफी परेशानी हुई है। कुछ किसानों ने बोरिंग से पानी करके बुआई की थी लेकिन पर्याप्त पानी की कमी और भीषण गर्मी के कारण पौधे सूखने लगे थे। हालांकि मौसम में हुए बदलाव से काफी फायदा होगा। धान बिचड़ा पानी नहीं हो पाने की वजह से धूप में जल रहा था। लेकिन अब धान के बिचड़े को कोई नुकसान नहीं होगा।
बड़े पैमाने पर होती है क्षेत्र में धान की खेती : बरबीघा प्रखंड के सभी 10 पंचायतों में बड़े पैमाने पर किसानों द्वारा धान की खेती की जाती है।हालांकि पिछले के वर्षों से पर रहे सुखाड़ के कारण किसानों के चेहरे पर इस बार भी चिंता की रेखाएं साफ देखी जा सकती। मुख्य रूप से खेती पर निर्भर हजारों किसान बारिश नहीं होने से किसान काफी परेशान होते है। किसानों के लिए वरदान अपर सकरी नहर में भी पर्याप्त पानी नहीं आ पाता है इस कारण धान के फसल पर इसका प्रतिकूल असर पड़ता है।

हालांकि मौसम में बदलाव के बाद किसानों को उम्मीद जगी है कि अब लगातार बारिश होगी। किसानों ने बारिश नहीं होने पर पम्प सेट की सहायता से पटवन कर धान का बिचड़ा खेतों में गिराना शुरू किया था जो सिलसिला अभी तक जारी है। किसानों का कहना है कि अब अगर लगातार बारिश नहीं होती है तो किसानों को इस बार भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इस संबंध में कृषि समन्वयक राजेश कुमार ने बताया कि धान के बिचड़ो की बुआई का सही समय 15 मई से 15 जून निर्धारित किया गया है। लेकिन किसान 30 मई तक वैसे धान के बिचड़ों की बुआई कर सकते हैं जिसकी फसल 3 महीने से कम अवधि में तैयार हो जाते हैं। हालांकि उन्होंने बताया कि अगर 30 जून तक लगातार बारिश नहीं होती है तो धान की खेती इस बार प्रभावित हो सकती है।



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