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Sunday, May 31, 2020

प्रतिनिधियों और अधिकारियों ने नहीं समझा किसानों का दर्द तो खुद के चंदे और लॉकडाउन में घर लौटे मजदूरों के सहयोग से बना डाली सड़क https://ift.tt/2MdQs2T

पिपरासी प्रखंड की मंझरिया पंचायत के नैनहा सरेह में जाने वाली मुख्य सड़क का जिर्णोद्धार आखिरकार वहां के लोगों ने लोक भागीदारी एवं लॉकडाउन के दौरान घर लौटे मजदूरों के सहयोग से कर दिया है। बताते चलें कि इस सड़क के जर्जर होने के कारण क्षेत्र के किसानों को प्रत्येक वर्ष लाखों रुपये की क्षति उठानी पड़ती थी। पंचायत के लोग इस सड़क के महत्व को देखते हुए इसकी मरम्मती के लिए जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों से गुहार लगा कर थक चुके थे। किसी भी स्तर पर कोई सुनवाई नही होने पर किसान खुद सड़क की मरम्मती के लिए आगे आए।

किसानों ने समाजसेवी दिनेश पांडेय के नेतृत्व आपस में बैठक कर निर्णय लिया कि सभी किसान जितना हो सके स्वेच्छा से सड़क निर्माण व मरम्मती में अपना सहयोग देंगे। जिसके पास पैसा नही है वह श्रम दान करेगा। जिनके पास ट्रेक्टर आदि साधन है वे उससे ही सहयोग करेंगे। सभी किसानों ने एक मत से निर्णय लिया और सभी लोगों ने पैसा इकठ्ठा करके सड़क निर्माण का कार्य शुरू कर दिया।
सड़क को लेकर जनप्रतिनिधियों की उदासीनता पर ग्रामीणों में आक्रोश है
इस सड़क के निर्माण की मांग को जन प्रतिनिधियों द्वारा ध्यान नही देने को लेकर पंचायत के लोगों में जनप्रतिनिधियों के खिलाफ खासी नाराजगी है। ग्रामीणों ने कहा कि किसानों की फिक्र नहीं करने वाले प्रतिनिधियों को वे चुनाव में सबक सिखाएंगे। सड़क निर्माण में मुख्य रूप से शर्मा पांडेय, शीतल प्रसाद, रामअवतार कुशवाहा, सौदागर कुशवाहा, अमोध गुप्ता, राजकुमार, सन्हू कुशवाहा आदि ने सक्रिय भूमिका निभाई है।

लॉकडाउन में घर लौटे प्रवासी मजदूरों ने सड़क के निर्माण के लिए किया श्रम दान
लॉक डाउन के दौरान घर लौटे प्रवासीय मजदूरों के पास कोई रोजगार नही होने के कारण वे लोग भी अब खेतीबाड़ी में लग गए हैं। लेकिन खेतों में जाने के लिए सड़क नही होने के कारण प्रवासीय मजदूरों ने सड़क निर्माण में श्रमदान किया। श्रमिकों ने बताया कि अब वे लोग दूसरी जगह कमाने नही जाएंगे। अब घर पर रह कर मेहनत मजदूरी व खेतीबाड़ी करके जीवन यापन करेंगे।
मरम्मती में अभी तक 50 हजार रुपए खर्च हुए
किसानों ने बताया कि इस सड़क का निर्माण शुरू करने से पहले किसानों ने सड़क की पैमाईश भी कराई है। अब सड़क बन जाने से बरसात के मौसम में भी आवागमन सुगम हो जाएगा। गन्ना, केला आदि फसल के परिवहन मद में खर्च कम होने से किसानों को राहत मिल सकेगी। इस सड़क की मरम्मती में अभी तक 50 हजार रुपए खर्च हो चुके हैं। इसमे जेसीबी व अन्य साधनों पर हुए खर्च शामिल हैं। ग्रामीणों ने बताया कि इस सड़क में दो पुलिया का भी निर्माण भी कराना है। और इसे भी अविलंब कर लिया जाएगा।



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Representatives and officials did not understand the pain of the farmers, with their own donations and the support of the workers who returned home in lockdown, the road was built


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