साहब अब कोरोना से ज्यादा गंदगी से डर लग रहा है। कोई उपाय करें नही तो सांस लेना भी मुश्किल हो जाएगा। गंदा पड़ा शौचालय व पेयजल की समस्या से जूझ रहे बिहार पब्लिक स्कूल में आए हुए प्रवासी मजदूरों का कहना है। शौचालय में फैली पानी की बोतलें यह बताने के लिए काफी है कि यहां ठहरने वालों को शौचालय में पानी तक ठीक से नसीब नही हो पा रहा है।
सरकार द्वारा मजदूरों को बुलाए जाने पर आये दिन यूपी के बार्डर से होकर आने वाले मजदूर, महिला व आम जनों को पहले बिहार पब्लिक स्कूल सेंटर पर लाने की व्यवस्था की गई है। जहां स्क्रिनिंग के साथ ही नाम, मोबाइल नम्बर व एड्रेस नोट करने के बाद सूची तैयार की जा रही है। इसके बाद उन्हें संबंधित जिले व प्रखंड आदि में बस के माध्यम से भेजा रहा है। इतना ही नही श्रमिक ट्रेन से उतरने वालों को भी यहां लाया जा रहा है। ऐसे में यहां लगातार श्रमिकों का तांता लग रहा है। हालांकि राज्य सरकार के निदेश के आलोक में इन्हें खाना खिलाने आदि की व्यवस्था की गई है।
दोपहर में चावल कढ़ी सब्जी दिया गया। जैसा की श्रमिकों ने बताया। खाना की बात छोड़ यहां ठहरे लोगों की माने तो गंदगी का आलम यह हो गया है कि यहां के लोगों को कोरोना से अधिक कई और बीमारी के होने का स्पष्ट संकेत दे रहा है। खास कर उन्हें दिक्कतें हो रही है जो तीन से चार दिन ट्रैवल करते हुए इस जांच सेंटर पर पहुंच रहे हैं। इस दौरान काउंटरों पर नाम लिखवाने के क्रम में प्रवासियों की भीड़ उमड़ पड़ी जो सोशल डिस्टेंसिंग की भी धज्जियां उड़ाने के लिए काफी रही।
इस दौरान आपदा प्रभारी सह डीसीएलआर प्रभात कुमार ने कहा कि सफाई व्यवस्था को लेकर निदेश दिया गया है। बता दें कि लगातार प्रवासियों के आने के बाद क्वारेंटिंग सेंटरों पर लगातार हंगामें की खबर आ रहीं है। सेंटर पर कुव्यवस्था से प्रवासी परेशान हो रहे हैं।
शाैचालय व पेयजल की समस्या बरकरार: एक ओर जहां कोरोना महामारी से जंग लड़ने को लेकर इन श्रमिकों को यहां पर जांच कर भेजने की व्यवस्था की गई है। वहीं दूसरी ओर यहां की कुव्यवस्था इन लोगों को विभिन्न बीमारियों को आमंत्रित कर रही है। क्योंकि यहां रहने वालों के लिए जो शौचालय है वहां गंदगी का अंबार है। स्थिति ऐसी हो गई है कि वहां जाने पर उल्टी होने की आशंका बनी रह रही है। सबसे बड़ी बात यह है कि उसी के समीप पानी टंकी से जुड़ी नल है। जहां कईयों की टोटी सूख चूकी है। जबकि एक ही नल कारगर दिखा। जो उसी शौचालय की करीब है जहां मक्खियां मंडराती रह रही है। ताज्जुब की बात यह है इसी परिसर में इन प्रवासी श्रमिकों के लिए भोजन भी बन रहा है। ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहां रहने वाले व ड्यूटी करने वालों की क्या हालत होगी।
प्रयागराज से निशुल्क बस सेवा से होकर कैमूर बार्डर पर पहुंच: गोवा में मजदूरी करने वाले बक्सर पहुंचे श्रमिक भले ही अपने जिला में पहुंच गए। किंतु इस दौरान उनके लिए किए गए व्यवस्था को सराहने से भी पीछे नही हटे। क्योंकि खाली पॉकेट व खाने की व्यवस्था नही होने पर गोवा सरकार द्वारा इन श्रमिकों को रेलवे का फ्री टिकट दिया। इतना ही नही खाना भी खिलाया। अखिलेश कुमार ने बताया कि 15 मई को शाम 7 बजे वहां से ट्रेन पकड़े जो मध्य प्रदेश के रीवा में 5 बजे सुबह पहुंचे। वहां भी इन्हें बिस्कुट, केला व पानी आदि मिला। इसके बाद बस के माध्यम से यूपी में प्रवेश किए। जहां प्रयागराज से निशुल्क बस सेवा से होकर कैमूर बार्डर पर पहुंचे। जहां से राज्य सरकार द्वारा की व्यवस्था के तहत बक्सर पहुंचे।
ड्यूटी करने वालों के लिए नही है कोई व्यवस्था
न दाना न पानी फिर ड्यूटी है बजानी। कुछ इसी तर्ज पर इन सेंटरों पर न केवल पुलिस कर्मी बल्कि शिक्षक व अन्य कर्मी काम करने को विवश है। सही मायने में देखी जाए तो हाई रिस्क लेकर यहां के कर्मी ड्यूटी कर रहे हैं। कोई सुबह पांच से ड्यूटी करता है तो कोई देर रात तक ऐसे में इनके लिए नाश्ता व खाना की कौन कहे पानी तक की व्यवस्था नही है। ऐसे में इन कर्मियों को काेराेना के साथ साथ घंटों बे पानी व नाश्ता के ही अपने कर्तव्यों का निर्वहन करनी पड़ रही है।
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