प्रवासियों के लिए अनुमंडल में बनाए गए क्वारेंटाइन सेंटर महज खानापूर्ति तक सिमट कर रह गए है। इन क्वारेंटाइन सेंटरों पर न तो गार्ड तैनात रहते है और न ही क्वारेंटाइन लोगों को निगरानी में रखा जा रहा है। कई केन्द्रों पर तो उनके परिजन भी मुलाकात करने पहुंच रहे है तथा घर से खाना-पानी आदि ले जाकर दे रहे है। ताज्जुब कि ऐसा करने पर उन्हें न तो कोई रोकता है और न ही क्वारेंटाइन लोगों को ही कुछ हिदायतें दी जा रही है।
जिससे क्वारेंटाइन लोगों का बाहर के लोगों से संपर्क और इससे कोरोना का संक्रमण फैलने का खतरा बना हुआ है। वैसे भी जिले में अबतक सात प्रवासी श्रमिक कोरोना पॉजिटिव हो चुके है। सरकार द्वारा उन्हें दूसरे प्रदेशों से बुलाकर सख्ती से क्वारेंटाइन करने के निर्देश दिए गए है। सैकड़ों की तादात में क्वारेंटाइन सेंटर बना वहा उनके रहने तथा भोजन की व्यवस्था भी की गई है।
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