मधेपुरा रेल इंजन फैक्ट्री के लिए पूर्व में अधिगृहीत 80 एकड़ भूमि की खरीद-बिक्री पर रोक लगाने के लिए रेलवे के उपमुख्य अभियंता ने जिला प्रशासन और निबंधक को पत्र भेजा है। यह भूमि रेल इंजन फैक्ट्री के बाहर स्थित है। रेलवे को जानकारी मिली थी कि कतिपय भू-स्वामी भूमि की खरीद-बिक्री कर रहे हैं। जबकि कुछ लोगों ने उक्त भूमि से मिट्टी कटवा कर बेचना शुरू कर दिया है।
ज्ञात हो कि विद्युत रेल इंजन कारखाना हेतु मधेपुरा जिले के तुनियाही, चकला और श्रीपुर मौजा की कुल 1100 एकड़ जमीन अधिग्रहण की अधिसूचना रेलवे द्वारा वर्ष 2008 में ही रेल अधिनियम 2008 के तहत की गई थी। इसके लिए पांच लाख रुपए प्रति एकड़ की दर से मुआवजा का निर्धारण किया गया था। लेकिन किसानों द्वारा भूमि अधिग्रहण का विरोध करते हुए आंदोलन कर दिया गया।
इसके बाद तत्कालीन रेलमंत्री ने इस परियोजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया था। लेकिन रेलवे द्वारा 2008 में ही भू-स्वामियों को 120 एकड़ भूमि का 80 प्रतिशत मुआवजा पांच लाख रुपए प्रति एकड़ की दर से भुगतान कर दिया था। पुनः 2015 में इस रेल फैक्ट्री के निर्माण का कार्य शुरू किया गया। निर्माण कार्य के दौरान रेल अधिकारियों ने डीएम को भूमि का कब्जा दिलाने को पत्र भेजा, तो इस बार मात्र 300 एकड़ भूमि पर ही कारखाना निर्माण के लिए परियोजना तय की गई।
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