प्रवासियों को घर वापस लाने के लिए किए गए सरकारी इंतजाम नाकाफी साबित हो रहें हैं। जिले के कई श्रमिक अपने बलबूते कई गुणा अधिक किराया देकर घर लौट रहे हैं। वही अपने बलबूते घर लौटने वाले श्रमिकों को प्रशासन के लोग जानकारी देने में भी आनाकानी करते हैं। शुक्रवार को प्रशांत टॉकीज के पास खड़े 9 श्रमिकों ने बताया कि वे सभी दिल्ली से आ रहा है।
सोनबरसा थाना क्षेत्र के असनही गांव निवासी राजेश कुमार, जीतन कुमार, अरूण, छुतहरू मुखिया ने बताया कि उन लोगों का 10 आदमी का जत्था था। जिसमें एक आदमी सहरसा के नजदीक के किसी गांव का था। श्रमिकों ने कहा कि 40 हजार रुपए में दिल्ली से बस रिजर्व कर सुबह करीब 5 बजे मुज्जफरपुर पहुंचा था। वहां भी उन लोगों को प्रशासन से कोई बस नहीं मिली।
श्रमिकों ने मुज्जफरपुर से सहरसा के लिए 5 हजार रुपए में बस रिजर्व किया। बस के ड्राइवर ने उन लोगों को शहर की सीमा के पास ही उतार दिया। इन श्रमिकों को पता था कि स्टेडियम में जांच एवं निबंधन कराने के बाद प्रखंड मुख्यालय स्थित क्वारेंटाइन सेंटर में भेजा जाता है।
स्टेडियम जाने के लिए ये लोग स्टेशन पहुंचे, ताकि वहां से बस द्वारा स्टेडियम भेजा जा सके। इन श्रमिकों ने बताया कि स्टेशन पहुंचने पर पुलिस द्वारा भगा दिया गया। कहा गया कि यहां लगी बस सिर्फ ट्रेन से उतरने वाले प्रवासियों के लिए है। इन श्रमिकों ने बताया कि वहां पर कुछ पूछने पर कोई जवाब देने वाला भी नहीं था।
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