41 दिन के इंतजार के बाद पूर्वी बिहार के सबसे बड़े मेडिकल काॅलेज अस्पताल में काेराेना मरीजाें के लिए प्लाज्मा थेरेपी की सुविधा बहाल हाे गई। गुरुवार काे अस्पताल में पहली बार काेराेना मरीज काे प्लाज्मा सफलतापूर्वक चढ़ाया गया। पहला प्लाज्मा डाेनर बनने का श्रेय ब्लड बैंक के ही लैब टेक्नीशियन शानू और लाभ लेनेवाली बांका सदर अस्पताल में तैनात 60 वर्षीय लेडी डाॅक्टर काे मिला।
महिला काे गंभीर हालत में एक सितंबर काे आईसीयू में भर्ती कराया गया था। अब महिला का आक्सीजन लेवल 90 पर आ गया है। प्लाज्मा चढ़ाने के दाैरान एनेस्थेटिक डाॅ. महेश कुमार ने अपनी टीम के साथ खुद की निगरानी में दाे घंटे के अंदर इसे पूरा किया। इधर, दाेपहर 12 बजे एफेरेसिस मशीन से ब्लड बैंक के प्रभारी डाॅ. रेखा झा व मेडिकल ऑफिसर डाॅ. दिव्या सिंह ने अपनी माैजूदगी में प्लाज्मा निकलवाया।
इसके लिए बाकायदा आईसीयू से डाॅ. राेहित काे भी बुलाया गया था। अब यहां काेराेना मरीजाें की जान बचाने के लिए एक संजीवनी के तर्ज पर प्लाज्मा थेरेपी काम करेगी। 30 जुलाई काे पहली बार प्लाज्मा थेरेपी शुरू करने काे लेकर प्रस्ताव रखा था। प्लाज्मा चढ़ाने के दाैरान डाॅ. महेश कुमार, डाॅ. कुणाल, डाॅ. पांडू, डाॅ. कुंदन व नर्स शामिल थीं।
तैयार करने में लगे 30 मिनट
गुरुवार को प्लाज्मा-प्लेटलेट्स एफेरेसिस मशीन से ब्लड बैंक के टेक्निशियन शानू शरीर से 400 एमएल प्लाज्मा निकाला गया। ब्लड बैंक की प्रभारी डॉ. रेखा झा ने बताया कि प्लाज्मा को 24 घंटे के अंदर मरीज को चढ़ाने से ज्यादा लाभ मिलता है। इससे मरीज के शरीर में कोरोना के खिलाफ तेजी से एंटीबॉडी बनता है और बीमारी पर काबू पाया जा सकता है।
दूसरा डोनेशन 48 घंटे में संभव
ब्लड बैंक के मेडिकल ऑफिसर डॉ. दिव्या सिंह के अनुसार कोरोना काे मात दे चुका व्यक्ति 48 घंटे के अंदर दो बार और 15 दिन बाद तीसरी बार भी प्लाज्मा डाेनेट कर सकता है। डाेनर को सरकार पांच हजार रुपए प्रति यूनिट प्रोत्साहन राशि देगी। यह राशि उसके बैंक खाते में राज्य स्वास्थ्य समिति से भेजी जाएगी।
60 किलाे के मरीज काे 200 एमएल प्लाज्मा की जरूरत
आइसाेलेशन वार्ड के नाेडल प्रभारी डाॅ. हेमशंकर शर्मा ने बताया कि इसमें 60 से 70 किलाे वजन के मरीज काे 200 एमएल प्लाज्मा की जरूरत हाेगी। प्लाज्मा थेरेपी से मरीज का ऑक्सीजन लेवल मेंटेन हाेता है। इससे संक्रमण का लेवल भी कम हाेने लगता है। लेकिन इसका असर तीसरे दिन ही पता चलता है।
हमें मिला सुकून : मुंगेर दरियापुर के रहनेवाले लैब टेक्नीशियन कुमार शानू ने बताया 19 जुलाई काे काेराेना पाॅजिटिव हुए और 31 जुलाई काे निगेटिव हुए। ब्लड बैंक में एफेरेसिस मशीन लगी ताे हमने साेचा कि पहला डाेनर बनेंगे। इसके बाद यह अवसर हमे मिला। मेरी वजह से किसी की जान बचेगी ताे हमें बहुत ही सुकून मिलेगा।
जगी उम्मीद, हराऊंगी कोरोना को महिला डाॅक्टर ने अस्पताल के डाॅक्टराें का आभार व्यक्त किया। उन्हें अब उम्मीद है कि वह जल्दी काेराेना काे हराने में कामयाब हाेंगी। वह पहले की तरह मरीजाें की सेवा के लिए तैयार रहेगी। परिजनाें ने भी इस थेरेपी के शुरू हाेने पर राहत महसूस करते हुए एक नयी उम्मीद काे महसूस किया है।
प्लाज्मा थेरेपी: वह सब जो आपकाे जानना जरूरी है
- क्या होता है प्लाज्मा: प्लाज्मा खून का तरल हिस्सा होता है, जिसके जरिए एंटीबॉडी शरीर में भ्रमण करते हैं।
- क्या है यह थेरेपी: प्लाज्मा डोनर के खून से निकालकर संक्रमित व्यक्ति के शरीर में डाला जाता है।
- कैसे निकालते हैं प्लाज्मा: डोनर के खून से निकाले प्लाज्मा से दो लोगों का इलाज किया जा सकता है। 200 मिलीग्राम प्लाज्मा चढ़ाते हैं।
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