जदयू सांसद आरसीपी सिंह ने प्रवासी शब्द पर घोर आपत्ति की। कहा-जब देश में नागरिकता एक है, तो फिर कहां से आया प्रवासी शब्द? उन्होंने श्रमिकों के लिए प्रवासी शब्द का इस्तेमाल बंद करने की बात कही। वे कोविड 19 व सरकार की ओर से उठाए गए कदमों पर राज्यसभा में चर्चा के दौरान बोल रहे थे। उन्होंने कोरोना वारियर्स को धन्यवाद दिया। इस रोग के कारण जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि दी।
हमारा देश एक, नागरिकता भी एक
उन्होंने कहा कि देश का संविधान हमें देश में किसी भी जगह पर रहने और काम करने की आजादी देता है। अर्थव्यवस्था में पूंजी भी है, पूंजीपति भी हैं और श्रमिक भी हैं। ऐसे में केवल श्रमिकों के मामले में ही प्रवासी का मुद्दा क्यों उठाया जाता है? बिहार की पीड़ा देखिए। वहां के लोगों ने देश के हर क्षेत्र के निर्माण के लिए कार्य किया है और दिन भर उनको प्रवासी कह कर अलग-थलग करने का प्रयास किया जाता है। जबकि हमारा देश एक है, हमारी नागरिकता एक है।
विकास में श्रम की भूमिका का सम्मान होना चाहिए। बिहार में किसी बैंक की राजधानी नहीं है, तो क्या हम प्रवासी बैंक लिखवा दें? किसी इंश्योरेंस कंपनी की वहां राजधानी नहीं है तो क्या हम वहां प्रवासी इंश्योरेंस कंपनी लिखवा दें? यह सही नहीं होगा। उन्होंने सदन को विस्तार से बताया कि बिहार सरकार ने कोरोना काल में क्या-क्या किया, कैसे लोगों की मदद की? उन्होंने केंद्र सरकार से कोरोना जांच, इलाज के मोर्चे पर मदद की अपेक्षा की।
इंस्टीट्यूट ऑफ टीचिंग एंड रिसर्च इन आयुर्वेद बिल 2020 का किया समर्थन
आरसीपी सिंह ने इंस्टीट्यूट ऑफ टीचिंग एंड रिसर्च इन आयुर्वेद बिल 2020 का समर्थन किया। कहा- हर प्रदेश में आयुर्वेद का एक नेशनल इंस्टीट्यूट हो। आयुर्वेदिक दवाओं की गुणवत्ता पर खास ध्यान रहे। आए दिन मिलावट की शिकायतें मिलती रहती हैं। छापेमारी भी होती है। पर इसके बावजूद इस तरह के मामलों में कोई कमी नहीं आती। सरकार को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए कि लोग दवाओं में मिलावट करने से पहले कम से कम लाख बार सोचें।
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