कोरोना संकटकाल में भी जिले की औद्योगिक विकास की योजना की रफ्तार कम नहीं होने दी जाएगी। डीएम नवीन कुमार ने उक्त आशय का संकल्प व्यक्त करते हुए मंगलवार को औद्योगिक विकास की योजनाओं की समीक्षा के दौरान संबंधित अधिकारियों को काम की गति को तेज करने के लिए जरूरी उपाय करने को कहा।
बैठक के बाद उन्होंने बताया कि जिले में औद्योगिक विकास का काम लॉकडाउन की वजह से थोड़ा मंद हुआ था लेकिन जिला प्रशासन का फोकस उस दिशा में कम नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि जिले में लॉकडाउन की अवधि में भी 42 लघु औद्योगिक इकाइयों व उद्यमों की स्थापना की गई है।
तिरेसठ उद्यमियों को उद्योग विभाग से स्वीकृति के बाद बैंकों से ऋण की स्वीकृति भी मिल गई है। फिलहाल तीन बड़े प्रोजेक्ट्स प्रक्रियाधीन हैं। उसमें एक प्लास्टिक सामाग्री फैक्ट्री, कन्सट्रकसन, मटेरियल उद्योग व एक बड़ा आटा मिल स्थापित किया जाना है। वे अगले कुछ दिनों में तीनों प्रोजेक्ट का उद्घाटन करेंगे।
प्लास्टिक की सामाग्री फैक्ट्री में बाहर से आए पचास श्रमिकों, कन्स्ट्रक्शन मटेरियल उद्योग में लगभग 350 वापसी श्रमिकों तथा बड़ा आटा मिल में चालीस से पचास वापसी श्रमिकों को रोजगार मिलेगा।न्होंने बताया कि जिले में दर्जनों छोटे-बड़े प्रोजेक्ट्स अभी प्रक्रियाधीन है, जिसमें बिस्कुट फैक्ट्री, फ्लाई ऐश ब्रेकस, कांटी फैक्ट्री, पैकेट चावल फैक्ट्री, नूडल्स मिनी प्लान्ट, हैचरी उद्योग, मिनी आटा मिल, अगरबत्ती निर्माण, चावल मूढ़ी उद्योग, बेकरी उद्योग इत्यादि शामिल हैं। अगले जिले में इस साल कुल 63 आवेदन स्वीकृत हो गए हैं, जिसमें से 46 औद्योगिक इकाइयों की शुरूआत हो गई है। इस महीने छह और उद्योगों की शुरूआत की योजना पर काम लगभग अंतिम चरण में है। डीएम ने बताया कि सूक्ष्म उद्योगों की कुल लागत 05 करोड़ 20 लाख है। अभी तक प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत 260 से अधिक स्थानीय व वापसी श्रमिकों को इकाइयों में रोजगार मिल चुका है।
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