मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि राज्य के लोगों ने फिर मौका दिया तो हम सभी गांव को एक-दूसरे से सड़क के जरिए एनएच-एसएच से जोड़ेंगे। मुख्यमंत्री ने गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से 1992 करोड़ रुपए लागत की 1985 किलोमीटर सड़क व 36 पुलों का उद्घाटन और 15192 करोड़ रुपए की 14240 किलोमीटर सड़कों व 165 पुलों के निर्माण कार्य का शिलान्यास किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि गांवों को आपस में पक्की सड़कों से जोड़ने की कार्ययोजना बनाने की जिम्मेदारी हमने मुख्य सचिव को सौंपी है। इससे ग्रामीण इलाकों में सड़कों का और भी बड़ा नेटवर्क तैयार हो सकेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम लोगों की सेवा के लिए काम करते हैं, हम राज नहीं करते, सेवा करना ही हमारा धर्म है। हमने हर गांव, हर टोले को सड़क से जोड़ने का निश्चय किया, वह काम लगभग पूरा हो गया है। हमने वादा किया है, अगली बार आएंगे तो हर खेत तक सिंचाई का पानी पहुंचा देंगे, उस पर अभी से ही काम शुरू हो गया है। कार्यक्रम में मुख्य सचिव दीपक कुमार, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव चंचल कुमार, योजना व विकास सचिव मनीष कुमार वर्मा, आईपीआरडी सचिव अनुपम कुमार और मुख्यमंत्री के ओएसडी गोपाल सिंह उपस्थित थे। 2005 से पहले बिहार में सिर्फ 835 किमी ग्रामीण सड़कें थीं सीएम ने कहा कि बोलने वाले कुछ का कुछ बोलते रहते हैं। लेकिन 2005 से पहले ग्रामीण सड़कों की क्या स्थिति थी? बिहार में सिर्फ 835 किलोमीटर ग्रामीण सड़कें बनी हुई थीं। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने वर्ष 1998 में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की शुरुआत की। लेकिन उस समय बिहार में राज कर रहे लोगों ने इस योजना पर कोई काम नहीं किया। बिहार के लोगों ने नवंबर 2005 में हमें सेवा करने का मौका दिया। उस समय से हम लोगों ने अपने कार्यकाल में 96500 किलोमीटर ग्रामीण सड़कों का निर्माण कराया। वहीं 14833 किलोमीटर सड़कों का निर्माण जारी है। वहीं उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि राज्य में घर-घर तक सड़क, बिजली और पानी पहुंच जाने से गांव और शहरों के बीच का फर्क खत्म हो गया हैं। गांवों व टोलों को बारहमासी एकल सम्पर्क पथ से जोड़ने व नली-गली पक्कीकरण की योजना अंतिम चरण में है। कहा- सड़कों के निर्माण के लिए अब पेड़ों को नहीं काटा जाएगा। अगर जरूरत पड़ी तो सड़क की डिजायन में बदलाव किया जाएगा। वहीं ग्रामीण कार्य मंत्री शैलेश कुमार ने कहा कि बिहार में शराबबंदी के बाद से निबंधित ठेकेदारों की संख्या बढ़ गई है। शराबबंदी से पहले 910 निबंधित ठेकेदार थे, वह आज 9371 हो गई है। ग्रामीण सड़क योजनाओं की स्थिति 2962 करोड़ रुपए खर्च करके मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के माध्यम से 6795 किलोमीटर लंबाई की 2815 सड़कों का निर्माण कराया गया । इससे 5394 बसावटों को जोड़ा गया। 9173 करोड़ की लागत से मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना के तहत 33399 किलोमीटर लंबाई की 11890 सड़कों का निर्माण कराया गया। इससे 40637 बसावटों को जोड़ा गया। 4400 टोलों को पक्की सड़क से जोड़ने के लिए चिन्हित किया गया टोला संपर्क निश्चय योजना के तहत । इनमें से सिर्फ 182 टोलों को जोड़ा जाना बाकी है। टोला सम्पर्क निश्चय योजना के लिए संसाधनों की कमी नहीं होने दी गई। बजट के अतिरिक्त विश्व बैंक, नाबार्ड और ब्रिक्स के न्यू डेवलपमेंट बैंक से कर्ज लिया गया है। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today CM's announcement- If we get a chance, we will connect villages with NH-SH, we built 96500 km of new road - VTM Breaking News

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Friday, August 21, 2020

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि राज्य के लोगों ने फिर मौका दिया तो हम सभी गांव को एक-दूसरे से सड़क के जरिए एनएच-एसएच से जोड़ेंगे। मुख्यमंत्री ने गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से 1992 करोड़ रुपए लागत की 1985 किलोमीटर सड़क व 36 पुलों का उद्घाटन और 15192 करोड़ रुपए की 14240 किलोमीटर सड़कों व 165 पुलों के निर्माण कार्य का शिलान्यास किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि गांवों को आपस में पक्की सड़कों से जोड़ने की कार्ययोजना बनाने की जिम्मेदारी हमने मुख्य सचिव को सौंपी है। इससे ग्रामीण इलाकों में सड़कों का और भी बड़ा नेटवर्क तैयार हो सकेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम लोगों की सेवा के लिए काम करते हैं, हम राज नहीं करते, सेवा करना ही हमारा धर्म है। हमने हर गांव, हर टोले को सड़क से जोड़ने का निश्चय किया, वह काम लगभग पूरा हो गया है। हमने वादा किया है, अगली बार आएंगे तो हर खेत तक सिंचाई का पानी पहुंचा देंगे, उस पर अभी से ही काम शुरू हो गया है। कार्यक्रम में मुख्य सचिव दीपक कुमार, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव चंचल कुमार, योजना व विकास सचिव मनीष कुमार वर्मा, आईपीआरडी सचिव अनुपम कुमार और मुख्यमंत्री के ओएसडी गोपाल सिंह उपस्थित थे। 2005 से पहले बिहार में सिर्फ 835 किमी ग्रामीण सड़कें थीं सीएम ने कहा कि बोलने वाले कुछ का कुछ बोलते रहते हैं। लेकिन 2005 से पहले ग्रामीण सड़कों की क्या स्थिति थी? बिहार में सिर्फ 835 किलोमीटर ग्रामीण सड़कें बनी हुई थीं। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने वर्ष 1998 में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की शुरुआत की। लेकिन उस समय बिहार में राज कर रहे लोगों ने इस योजना पर कोई काम नहीं किया। बिहार के लोगों ने नवंबर 2005 में हमें सेवा करने का मौका दिया। उस समय से हम लोगों ने अपने कार्यकाल में 96500 किलोमीटर ग्रामीण सड़कों का निर्माण कराया। वहीं 14833 किलोमीटर सड़कों का निर्माण जारी है। वहीं उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि राज्य में घर-घर तक सड़क, बिजली और पानी पहुंच जाने से गांव और शहरों के बीच का फर्क खत्म हो गया हैं। गांवों व टोलों को बारहमासी एकल सम्पर्क पथ से जोड़ने व नली-गली पक्कीकरण की योजना अंतिम चरण में है। कहा- सड़कों के निर्माण के लिए अब पेड़ों को नहीं काटा जाएगा। अगर जरूरत पड़ी तो सड़क की डिजायन में बदलाव किया जाएगा। वहीं ग्रामीण कार्य मंत्री शैलेश कुमार ने कहा कि बिहार में शराबबंदी के बाद से निबंधित ठेकेदारों की संख्या बढ़ गई है। शराबबंदी से पहले 910 निबंधित ठेकेदार थे, वह आज 9371 हो गई है। ग्रामीण सड़क योजनाओं की स्थिति 2962 करोड़ रुपए खर्च करके मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के माध्यम से 6795 किलोमीटर लंबाई की 2815 सड़कों का निर्माण कराया गया । इससे 5394 बसावटों को जोड़ा गया। 9173 करोड़ की लागत से मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना के तहत 33399 किलोमीटर लंबाई की 11890 सड़कों का निर्माण कराया गया। इससे 40637 बसावटों को जोड़ा गया। 4400 टोलों को पक्की सड़क से जोड़ने के लिए चिन्हित किया गया टोला संपर्क निश्चय योजना के तहत । इनमें से सिर्फ 182 टोलों को जोड़ा जाना बाकी है। टोला सम्पर्क निश्चय योजना के लिए संसाधनों की कमी नहीं होने दी गई। बजट के अतिरिक्त विश्व बैंक, नाबार्ड और ब्रिक्स के न्यू डेवलपमेंट बैंक से कर्ज लिया गया है। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today CM's announcement- If we get a chance, we will connect villages with NH-SH, we built 96500 km of new road

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि राज्य के लोगों ने फिर मौका दिया तो हम सभी गांव को एक-दूसरे से सड़क के जरिए एनएच-एसएच से जोड़ेंगे। मुख्यमंत्री ने गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से 1992 करोड़ रुपए लागत की 1985 किलोमीटर सड़क व 36 पुलों का उद्घाटन और 15192 करोड़ रुपए की 14240 किलोमीटर सड़कों व 165 पुलों के निर्माण कार्य का शिलान्यास किया।
इस मौके पर उन्होंने कहा कि गांवों को आपस में पक्की सड़कों से जोड़ने की कार्ययोजना बनाने की जिम्मेदारी हमने मुख्य सचिव को सौंपी है। इससे ग्रामीण इलाकों में सड़कों का और भी बड़ा नेटवर्क तैयार हो सकेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम लोगों की सेवा के लिए काम करते हैं, हम राज नहीं करते, सेवा करना ही हमारा धर्म है। हमने हर गांव, हर टोले को सड़क से जोड़ने का निश्चय किया, वह काम लगभग पूरा हो गया है।

हमने वादा किया है, अगली बार आएंगे तो हर खेत तक सिंचाई का पानी पहुंचा देंगे, उस पर अभी से ही काम शुरू हो गया है। कार्यक्रम में मुख्य सचिव दीपक कुमार, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव चंचल कुमार, योजना व विकास सचिव मनीष कुमार वर्मा, आईपीआरडी सचिव अनुपम कुमार और मुख्यमंत्री के ओएसडी गोपाल सिंह उपस्थित थे।

2005 से पहले बिहार में सिर्फ 835 किमी ग्रामीण सड़कें थीं

सीएम ने कहा कि बोलने वाले कुछ का कुछ बोलते रहते हैं। लेकिन 2005 से पहले ग्रामीण सड़कों की क्या स्थिति थी? बिहार में सिर्फ 835 किलोमीटर ग्रामीण सड़कें बनी हुई थीं। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने वर्ष 1998 में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की शुरुआत की। लेकिन उस समय बिहार में राज कर रहे लोगों ने इस योजना पर कोई काम नहीं किया। बिहार के लोगों ने नवंबर 2005 में हमें सेवा करने का मौका दिया। उस समय से हम लोगों ने अपने कार्यकाल में 96500 किलोमीटर ग्रामीण सड़कों का निर्माण कराया। वहीं 14833 किलोमीटर सड़कों का निर्माण जारी है। वहीं उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि राज्य में घर-घर तक सड़क, बिजली और पानी पहुंच जाने से गांव और शहरों के बीच का फर्क खत्म हो गया हैं। गांवों व टोलों को बारहमासी एकल सम्पर्क पथ से जोड़ने व नली-गली पक्कीकरण की योजना अंतिम चरण में है। कहा- सड़कों के निर्माण के लिए अब पेड़ों को नहीं काटा जाएगा। अगर जरूरत पड़ी तो सड़क की डिजायन में बदलाव किया जाएगा। वहीं ग्रामीण कार्य मंत्री शैलेश कुमार ने कहा कि बिहार में शराबबंदी के बाद से निबंधित ठेकेदारों की संख्या बढ़ गई है। शराबबंदी से पहले 910 निबंधित ठेकेदार थे, वह आज 9371 हो गई है।

ग्रामीण सड़क योजनाओं की स्थिति

  • 2962 करोड़ रुपए खर्च करके मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के माध्यम से 6795 किलोमीटर लंबाई की 2815 सड़कों का निर्माण कराया गया । इससे 5394 बसावटों को जोड़ा गया।
  • 9173 करोड़ की लागत से मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना के तहत 33399 किलोमीटर लंबाई की 11890 सड़कों का निर्माण कराया गया। इससे 40637 बसावटों को जोड़ा गया।
  • 4400 टोलों को पक्की सड़क से जोड़ने के लिए चिन्हित किया गया टोला संपर्क निश्चय योजना के तहत । इनमें से सिर्फ 182 टोलों को जोड़ा जाना बाकी है। टोला सम्पर्क निश्चय योजना के लिए संसाधनों की कमी नहीं होने दी गई। बजट के अतिरिक्त विश्व बैंक, नाबार्ड और ब्रिक्स के न्यू डेवलपमेंट बैंक से कर्ज लिया गया है।


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