बिहार विधान परिषद चुनाव के लिए 9 सीटों पर सभी दलीय प्रत्याशियों की निर्विरोध जीत हो गई। नामांकन वापसी की अवधि खत्म होते ही विधानसभा के सचिव बटेश्वरनाथ पांडेय ने जीत की विधिवत घोषणा की। साथ ही सबको जीत का प्रमाण पत्र भी सौंपा। सभी का नामांकन वैध पाया गया था। 9 सदस्यों के निर्वाचित होने के बाद विधान परिषद में जदयू के 23, भाजपा के 18, राजद के 6, कांग्रेस के तीन, लोजपा और हम के एक-एक और दो निर्दलीय विधान पार्षद हैं। विधान परिषद की 9 सीटों के लिए जदयू-राजद ने 3-3, भाजपा ने 2 और कांग्रेस ने 1 उम्मीदवार मैदान में उतारा था। जदयू ने गुलाम गौस, भीष्म सहनी, कुमुद वर्मा को, भाजपा ने सम्राट चौधरी व संजय मयूख को, राजद ने सुनील सिंह, फारुख शेख व रामबली सिंह को और कांग्रेस ने समीर कुमार सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया था। विधानसभा में सदस्य संख्या के हिसाब से सबकी जीत पहले से पक्की थी। विधान परिषद में 9 सीटों के लिए चुनाव होना था, लेकिन सिर्फ 9 लोगों द्वारा ही नामांकन करने के कारण चुनाव की नौबत ही नहीं आई। इसके बाद सभी का निर्विरोध चुना जाना तय हो गया था। सोमवार को किसी ने नामांकन वापस नहीं लिया तो सबकी जीत तय हो गई। विधान परिषद चुनाव में जीत के लिए एक उम्मीदवार को कम से कम 25 वोट की आवश्यकता थी। मतलब 25 विधायकों के वोट से एक उम्मीदवार की जीत तय होती। सदस्य संख्या के हिसाब से सारे उम्मीदवारों को आवश्यक मत मिलना तय था। इस समय विधानसभा में राजद के 80, जदयू के 70, भाजपा का 54 और कांग्रेस 26 विधायक हैं। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today विधानसभा के सचिव बटेश्वरनाथ पांडेय ने सभी प्रत्याशियों की जीत की घोषणा की और प्रमाण पत्र सौंपा। - VTM Breaking News

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Tuesday, June 30, 2020

बिहार विधान परिषद चुनाव के लिए 9 सीटों पर सभी दलीय प्रत्याशियों की निर्विरोध जीत हो गई। नामांकन वापसी की अवधि खत्म होते ही विधानसभा के सचिव बटेश्वरनाथ पांडेय ने जीत की विधिवत घोषणा की। साथ ही सबको जीत का प्रमाण पत्र भी सौंपा। सभी का नामांकन वैध पाया गया था। 9 सदस्यों के निर्वाचित होने के बाद विधान परिषद में जदयू के 23, भाजपा के 18, राजद के 6, कांग्रेस के तीन, लोजपा और हम के एक-एक और दो निर्दलीय विधान पार्षद हैं। विधान परिषद की 9 सीटों के लिए जदयू-राजद ने 3-3, भाजपा ने 2 और कांग्रेस ने 1 उम्मीदवार मैदान में उतारा था। जदयू ने गुलाम गौस, भीष्म सहनी, कुमुद वर्मा को, भाजपा ने सम्राट चौधरी व संजय मयूख को, राजद ने सुनील सिंह, फारुख शेख व रामबली सिंह को और कांग्रेस ने समीर कुमार सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया था। विधानसभा में सदस्य संख्या के हिसाब से सबकी जीत पहले से पक्की थी। विधान परिषद में 9 सीटों के लिए चुनाव होना था, लेकिन सिर्फ 9 लोगों द्वारा ही नामांकन करने के कारण चुनाव की नौबत ही नहीं आई। इसके बाद सभी का निर्विरोध चुना जाना तय हो गया था। सोमवार को किसी ने नामांकन वापस नहीं लिया तो सबकी जीत तय हो गई। विधान परिषद चुनाव में जीत के लिए एक उम्मीदवार को कम से कम 25 वोट की आवश्यकता थी। मतलब 25 विधायकों के वोट से एक उम्मीदवार की जीत तय होती। सदस्य संख्या के हिसाब से सारे उम्मीदवारों को आवश्यक मत मिलना तय था। इस समय विधानसभा में राजद के 80, जदयू के 70, भाजपा का 54 और कांग्रेस 26 विधायक हैं। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today विधानसभा के सचिव बटेश्वरनाथ पांडेय ने सभी प्रत्याशियों की जीत की घोषणा की और प्रमाण पत्र सौंपा।

बिहार विधान परिषद चुनाव के लिए 9 सीटों पर सभी दलीय प्रत्याशियों की निर्विरोध जीत हो गई। नामांकन वापसी की अवधि खत्म होते ही विधानसभा के सचिव बटेश्वरनाथ पांडेय ने जीत की विधिवत घोषणा की। साथ ही सबको जीत का प्रमाण पत्र भी सौंपा। सभी का नामांकन वैध पाया गया था। 9 सदस्यों के निर्वाचित होने के बाद विधान परिषद में जदयू के 23, भाजपा के 18, राजद के 6, कांग्रेस के तीन, लोजपा और हम के एक-एक और दो निर्दलीय विधान पार्षद हैं।

विधान परिषद की 9 सीटों के लिए जदयू-राजद ने 3-3, भाजपा ने 2 और कांग्रेस ने 1 उम्मीदवार मैदान में उतारा था। जदयू ने गुलाम गौस, भीष्म सहनी, कुमुद वर्मा को, भाजपा ने सम्राट चौधरी व संजय मयूख को, राजद ने सुनील सिंह, फारुख शेख व रामबली सिंह को और कांग्रेस ने समीर कुमार सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया था। विधानसभा में सदस्य संख्या के हिसाब से सबकी जीत पहले से पक्की थी।

विधान परिषद में 9 सीटों के लिए चुनाव होना था, लेकिन सिर्फ 9 लोगों द्वारा ही नामांकन करने के कारण चुनाव की नौबत ही नहीं आई। इसके बाद सभी का निर्विरोध चुना जाना तय हो गया था। सोमवार को किसी ने नामांकन वापस नहीं लिया तो सबकी जीत तय हो गई। विधान परिषद चुनाव में जीत के लिए एक उम्मीदवार को कम से कम 25 वोट की आवश्यकता थी। मतलब 25 विधायकों के वोट से एक उम्मीदवार की जीत तय होती। सदस्य संख्या के हिसाब से सारे उम्मीदवारों को आवश्यक मत मिलना तय था। इस समय विधानसभा में राजद के 80, जदयू के 70, भाजपा का 54 और कांग्रेस 26 विधायक हैं।



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