लॉकडाउन के दौरान सड़क, रेलवे स्टेशन, शॉपिंग माल सहित सभी सार्वजनिक जगह वीरान पड़े थे। उस दौरान कुछ ऐसे लोग भी थे, जो अपने घरों के बुजुर्ग और दिमागी रूप से कमजोर लोगों को सड़क और अस्पताल में लावारिस छोड़ गए। ये ऐसे लोग हैं, जिन्हें अपना नाम, पता, उम्र और रिश्तेदारों के बारे में जानकारी ही नहीं है। वो जो जानकारी दे पाते हैं उससे उनके घर तक पहुंचना संभव नहीं। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि बुजुर्ग माता-पिता और परिजनों को लावारिस छोड़ने वाले लोग स्कूटी, बोलेरो और कार से उन्हें छोड़ गए। कुछ तो छाेड़ते समय बुजुर्ग का पैर छूकर आर्शीर्वाद भी लिया। अब इनकी जिम्मेदारी स्वयं सेवी संस्थाओं, आसपास के दुकानदार और कॉलेज जाने वाले स्टूडेंट उठा रहे हैं। बेटे कहते हैं भीख मांगो प्रत्यक्षदर्शी विकास के मुताबिक अप्रैल के पहले सप्ताह में 75 वर्षीय महिला को एक बोलेरो पर सवार तीन लोगों ने पीएमसीएच के किनारे छोड़ा। जाते समय उन्होंने महिला का पैर छूकर आशीर्वाद भी लिया। फिर वापस नहीं आए। महिला अपना पता मोरगंज से ज्यादा का नहीं बता पाती है। खाना मिलने पर बेटे काे गाली देने लगती है। कहती है कि बेटे हमेशा भीख मांगने काे कहते थे। फिर रोने लगती है। कुछ पूछने पर देती है गाली एग्जीबिशन रोड के किनारे एक 65 वर्षीय महिला, फटे कपड़े, बिखरे बाल और हर वक्त कुछ ना कुछ बोलती रहती है। कोई बात करने जाए तो पहले मारने काे दौड़ती है फिर उसी से खाना मांगती है। खाना देने वाला नाम पूछता है तो वह कभी रानी देवी तो कभी सविता बताती है। ज्यादा पूछने पर गाली देने लगती है। आसपास के दुकानदारों ने बताया, प्रथम लॉकडाउन के दौरान ही कोई उसे यहां छोड़ गया है। दो बेटे, फिर भी बेसहारा 70 वर्षीय रामसेवक कटिहार के रहने वाले हैं। उनके दो बेटे हैं और दोनों ही सरकारी नौकरी करते हैं। पूछने पर राम सेवक सिर्फ मुस्कुरा देते हैं। इनकी दिमागी हालत ठीक नहीं है। बताते हैं- लॉकडाउन के दौरान उनके बेटे पीएमसीएच में इलाज के लिए लाए थे और छोड़ कर चले गए। अब पीएमसीएच के ओपीडी के पास आश्रय लिए हैं। नेपाल से पहुंची महिला पीएमसीएच में इमरजेंसी गेट के पास बैठी लगभग 60 वर्षीय महिला को नाम, पता, परिवार के बारे में कुछ जानकारी नहीं है। वहां मौजूद लोगों का कहना है कि लॉकडाउन के दौरान कुछ लोग उसे पैदल ही यहां छोड़ गए थे। उससे जब कुछ पूछा जाता है, तो वे जबाव नहीं देती है। बस कभी-कभी वह रिना, गुड्डू और नेपाल का जिक्र करती है। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि बुजुर्ग माता-पिता और परिजनों को लावारिस छोड़ने वाले लोग स्कूटी, बोलेरो और कार से उन्हें छोड़ गए। - VTM Breaking News

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Wednesday, June 10, 2020

लॉकडाउन के दौरान सड़क, रेलवे स्टेशन, शॉपिंग माल सहित सभी सार्वजनिक जगह वीरान पड़े थे। उस दौरान कुछ ऐसे लोग भी थे, जो अपने घरों के बुजुर्ग और दिमागी रूप से कमजोर लोगों को सड़क और अस्पताल में लावारिस छोड़ गए। ये ऐसे लोग हैं, जिन्हें अपना नाम, पता, उम्र और रिश्तेदारों के बारे में जानकारी ही नहीं है। वो जो जानकारी दे पाते हैं उससे उनके घर तक पहुंचना संभव नहीं। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि बुजुर्ग माता-पिता और परिजनों को लावारिस छोड़ने वाले लोग स्कूटी, बोलेरो और कार से उन्हें छोड़ गए। कुछ तो छाेड़ते समय बुजुर्ग का पैर छूकर आर्शीर्वाद भी लिया। अब इनकी जिम्मेदारी स्वयं सेवी संस्थाओं, आसपास के दुकानदार और कॉलेज जाने वाले स्टूडेंट उठा रहे हैं। बेटे कहते हैं भीख मांगो प्रत्यक्षदर्शी विकास के मुताबिक अप्रैल के पहले सप्ताह में 75 वर्षीय महिला को एक बोलेरो पर सवार तीन लोगों ने पीएमसीएच के किनारे छोड़ा। जाते समय उन्होंने महिला का पैर छूकर आशीर्वाद भी लिया। फिर वापस नहीं आए। महिला अपना पता मोरगंज से ज्यादा का नहीं बता पाती है। खाना मिलने पर बेटे काे गाली देने लगती है। कहती है कि बेटे हमेशा भीख मांगने काे कहते थे। फिर रोने लगती है। कुछ पूछने पर देती है गाली एग्जीबिशन रोड के किनारे एक 65 वर्षीय महिला, फटे कपड़े, बिखरे बाल और हर वक्त कुछ ना कुछ बोलती रहती है। कोई बात करने जाए तो पहले मारने काे दौड़ती है फिर उसी से खाना मांगती है। खाना देने वाला नाम पूछता है तो वह कभी रानी देवी तो कभी सविता बताती है। ज्यादा पूछने पर गाली देने लगती है। आसपास के दुकानदारों ने बताया, प्रथम लॉकडाउन के दौरान ही कोई उसे यहां छोड़ गया है। दो बेटे, फिर भी बेसहारा 70 वर्षीय रामसेवक कटिहार के रहने वाले हैं। उनके दो बेटे हैं और दोनों ही सरकारी नौकरी करते हैं। पूछने पर राम सेवक सिर्फ मुस्कुरा देते हैं। इनकी दिमागी हालत ठीक नहीं है। बताते हैं- लॉकडाउन के दौरान उनके बेटे पीएमसीएच में इलाज के लिए लाए थे और छोड़ कर चले गए। अब पीएमसीएच के ओपीडी के पास आश्रय लिए हैं। नेपाल से पहुंची महिला पीएमसीएच में इमरजेंसी गेट के पास बैठी लगभग 60 वर्षीय महिला को नाम, पता, परिवार के बारे में कुछ जानकारी नहीं है। वहां मौजूद लोगों का कहना है कि लॉकडाउन के दौरान कुछ लोग उसे पैदल ही यहां छोड़ गए थे। उससे जब कुछ पूछा जाता है, तो वे जबाव नहीं देती है। बस कभी-कभी वह रिना, गुड्डू और नेपाल का जिक्र करती है। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि बुजुर्ग माता-पिता और परिजनों को लावारिस छोड़ने वाले लोग स्कूटी, बोलेरो और कार से उन्हें छोड़ गए।

लॉकडाउन के दौरान सड़क, रेलवे स्टेशन, शॉपिंग माल सहित सभी सार्वजनिक जगह वीरान पड़े थे। उस दौरान कुछ ऐसे लोग भी थे, जो अपने घरों के बुजुर्ग और दिमागी रूप से कमजोर लोगों को सड़क और अस्पताल में लावारिस छोड़ गए। ये ऐसे लोग हैं, जिन्हें अपना नाम, पता, उम्र और रिश्तेदारों के बारे में जानकारी ही नहीं है। वो जो जानकारी दे पाते हैं उससे उनके घर तक पहुंचना संभव नहीं।

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि बुजुर्ग माता-पिता और परिजनों को लावारिस छोड़ने वाले लोग स्कूटी, बोलेरो और कार से उन्हें छोड़ गए। कुछ तो छाेड़ते समय बुजुर्ग का पैर छूकर आर्शीर्वाद भी लिया। अब इनकी जिम्मेदारी स्वयं सेवी संस्थाओं, आसपास के दुकानदार और कॉलेज जाने वाले स्टूडेंट उठा रहे हैं।

बेटे कहते हैं भीख मांगो
प्रत्यक्षदर्शी विकास के मुताबिक अप्रैल के पहले सप्ताह में 75 वर्षीय महिला को एक बोलेरो पर सवार तीन लोगों ने पीएमसीएच के किनारे छोड़ा। जाते समय उन्होंने महिला का पैर छूकर आशीर्वाद भी लिया। फिर वापस नहीं आए। महिला अपना पता मोरगंज से ज्यादा का नहीं बता पाती है। खाना मिलने पर बेटे काे गाली देने लगती है। कहती है कि बेटे हमेशा भीख मांगने काे कहते थे। फिर रोने लगती है।

कुछ पूछने पर देती है गाली
एग्जीबिशन रोड के किनारे एक 65 वर्षीय महिला, फटे कपड़े, बिखरे बाल और हर वक्त कुछ ना कुछ बोलती रहती है। कोई बात करने जाए तो पहले मारने काे दौड़ती है फिर उसी से खाना मांगती है। खाना देने वाला नाम पूछता है तो वह कभी रानी देवी तो कभी सविता बताती है। ज्यादा पूछने पर गाली देने लगती है। आसपास के दुकानदारों ने बताया, प्रथम लॉकडाउन के दौरान ही कोई उसे यहां छोड़ गया है।

दो बेटे, फिर भी बेसहारा
70 वर्षीय रामसेवक कटिहार के रहने वाले हैं। उनके दो बेटे हैं और दोनों ही सरकारी नौकरी करते हैं। पूछने पर राम सेवक सिर्फ मुस्कुरा देते हैं। इनकी दिमागी हालत ठीक नहीं है। बताते हैं- लॉकडाउन के दौरान उनके बेटे पीएमसीएच में इलाज के लिए लाए थे और छोड़ कर चले गए। अब पीएमसीएच के ओपीडी के पास आश्रय लिए हैं।

नेपाल से पहुंची महिला
पीएमसीएच में इमरजेंसी गेट के पास बैठी लगभग 60 वर्षीय महिला को नाम, पता, परिवार के बारे में कुछ जानकारी नहीं है। वहां मौजूद लोगों का कहना है कि लॉकडाउन के दौरान कुछ लोग उसे पैदल ही यहां छोड़ गए थे। उससे जब कुछ पूछा जाता है, तो वे जबाव नहीं देती है। बस कभी-कभी वह रिना, गुड्डू और नेपाल का जिक्र करती है।



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प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि बुजुर्ग माता-पिता और परिजनों को लावारिस छोड़ने वाले लोग स्कूटी, बोलेरो और कार से उन्हें छोड़ गए।


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