सृजन घोटाला में फंसे भागलपुर के पूर्व डीडीसी प्रभात कुमार सिन्हा की गिरफ्तारी तय है। हाईकोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी है। जस्टिस चक्रधारी शरण सिंह की अदालत ने प्रभात सिन्हा को 16 जुलाई तक सीबीआई कोर्ट में सरेंडर करने को कहा है। सिन्हा 28 दिसंबर 2012 से 16 अप्रैल 2013 तक डीडीसी के रूप में भागलपुर में तैनात थे। उनके कार्यकाल में ही जिला परिषद को भेजी गई 13वीं वित्त आयोग की 16 करोड़ 89 हजार 751 रुपए राशि सृजन के खाते में गलत मंशा से ट्रांसफर करने का सीबीआई ने आरोप लगाया था। सिन्हा की ओर से वरीय अधिवक्ता यदुवंश गिरी, रजनीकांत झा और सीबीआई की ओर से बिपिन कुमार सिन्हा ने बहस में हिस्सा लिया। बिना जिप का खाता खोले बैंकर्स चेक सृजन को ट्रांसफर किया था सीबीआई ने जांच के दौरान घोटाला में सिन्हा की भूमिका उजागर की थी। सीबीआई की चार्जशीट में सिन्हा पर आरोप है कि जिला परिषद, पंचायत समितियां और ग्राम पंचायत के लिए 8.79 करोड़ का पीएल चेक 16 मार्च 2013 को ट्रेजरी से पास कराकर अकाउंट में ट्रांसफर कराने के लिए बैंकर्स चेक बनाया। लेकिन यह रकम इंडियन बैंक स्थित सृजन के खाते 822726120 में जमा करा दी। सीबीआई ने जांच में पाया कि जिस तारीख को बैंकर्स चेक बनाया था, उस समय इंडियन बैंक में इस योजना के लिए खाता भी नहीं खुला था। इसमें मनोरमा ने फर्जी पे इन स्लिप भरा था। नाजिर राकेश कुमार और बैंक के अन्य अधिकारियों के सहयोग से फिर 88 लाख और 6.32 करोड़ के दो चेक भी सृजन के खाते में जमा करा दिए गए। 2017 में कोतवाली थाने में दर्ज एफआईआर की जांच में फंसे सिन्हा सिन्हा की भूमिका कोतवाली थाने में दर्ज केस संख्या 513/2017 जो बाद में सीबीआई के केस संख्या आरसी 17(ए)/2017 स्पेशल केस संख्या 4/2018 की जांच के दौरान केंद्रीय जांच एजेंसी ने उजागर की थी। इस मामले में सिन्हा की ओर से पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम बनाम प्रवर्तन निदेशालय केस का रेफरेंस दिया गया और इसे आधार बनाकर अग्रिम जमानत का अनुरोध किया गया। लेकिन कोर्ट ने इस रेफरेंस के फैक्ट्स को सिन्हा के मामले से भिन्न मानते हुए अर्जी खारिज कर दी। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today - VTM Breaking News

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Wednesday, June 24, 2020

सृजन घोटाला में फंसे भागलपुर के पूर्व डीडीसी प्रभात कुमार सिन्हा की गिरफ्तारी तय है। हाईकोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी है। जस्टिस चक्रधारी शरण सिंह की अदालत ने प्रभात सिन्हा को 16 जुलाई तक सीबीआई कोर्ट में सरेंडर करने को कहा है। सिन्हा 28 दिसंबर 2012 से 16 अप्रैल 2013 तक डीडीसी के रूप में भागलपुर में तैनात थे। उनके कार्यकाल में ही जिला परिषद को भेजी गई 13वीं वित्त आयोग की 16 करोड़ 89 हजार 751 रुपए राशि सृजन के खाते में गलत मंशा से ट्रांसफर करने का सीबीआई ने आरोप लगाया था। सिन्हा की ओर से वरीय अधिवक्ता यदुवंश गिरी, रजनीकांत झा और सीबीआई की ओर से बिपिन कुमार सिन्हा ने बहस में हिस्सा लिया। बिना जिप का खाता खोले बैंकर्स चेक सृजन को ट्रांसफर किया था सीबीआई ने जांच के दौरान घोटाला में सिन्हा की भूमिका उजागर की थी। सीबीआई की चार्जशीट में सिन्हा पर आरोप है कि जिला परिषद, पंचायत समितियां और ग्राम पंचायत के लिए 8.79 करोड़ का पीएल चेक 16 मार्च 2013 को ट्रेजरी से पास कराकर अकाउंट में ट्रांसफर कराने के लिए बैंकर्स चेक बनाया। लेकिन यह रकम इंडियन बैंक स्थित सृजन के खाते 822726120 में जमा करा दी। सीबीआई ने जांच में पाया कि जिस तारीख को बैंकर्स चेक बनाया था, उस समय इंडियन बैंक में इस योजना के लिए खाता भी नहीं खुला था। इसमें मनोरमा ने फर्जी पे इन स्लिप भरा था। नाजिर राकेश कुमार और बैंक के अन्य अधिकारियों के सहयोग से फिर 88 लाख और 6.32 करोड़ के दो चेक भी सृजन के खाते में जमा करा दिए गए। 2017 में कोतवाली थाने में दर्ज एफआईआर की जांच में फंसे सिन्हा सिन्हा की भूमिका कोतवाली थाने में दर्ज केस संख्या 513/2017 जो बाद में सीबीआई के केस संख्या आरसी 17(ए)/2017 स्पेशल केस संख्या 4/2018 की जांच के दौरान केंद्रीय जांच एजेंसी ने उजागर की थी। इस मामले में सिन्हा की ओर से पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम बनाम प्रवर्तन निदेशालय केस का रेफरेंस दिया गया और इसे आधार बनाकर अग्रिम जमानत का अनुरोध किया गया। लेकिन कोर्ट ने इस रेफरेंस के फैक्ट्स को सिन्हा के मामले से भिन्न मानते हुए अर्जी खारिज कर दी। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today

सृजन घोटाला में फंसे भागलपुर के पूर्व डीडीसी प्रभात कुमार सिन्हा की गिरफ्तारी तय है। हाईकोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी है। जस्टिस चक्रधारी शरण सिंह की अदालत ने प्रभात सिन्हा को 16 जुलाई तक सीबीआई कोर्ट में सरेंडर करने को कहा है। सिन्हा 28 दिसंबर 2012 से 16 अप्रैल 2013 तक डीडीसी के रूप में भागलपुर में तैनात थे।

उनके कार्यकाल में ही जिला परिषद को भेजी गई 13वीं वित्त आयोग की 16 करोड़ 89 हजार 751 रुपए राशि सृजन के खाते में गलत मंशा से ट्रांसफर करने का सीबीआई ने आरोप लगाया था। सिन्हा की ओर से वरीय अधिवक्ता यदुवंश गिरी, रजनीकांत झा और सीबीआई की ओर से बिपिन कुमार सिन्हा ने बहस में हिस्सा लिया।

बिना जिप का खाता खोले बैंकर्स चेक सृजन को ट्रांसफर किया था
सीबीआई ने जांच के दौरान घोटाला में सिन्हा की भूमिका उजागर की थी। सीबीआई की चार्जशीट में सिन्हा पर आरोप है कि जिला परिषद, पंचायत समितियां और ग्राम पंचायत के लिए 8.79 करोड़ का पीएल चेक 16 मार्च 2013 को ट्रेजरी से पास कराकर अकाउंट में ट्रांसफर कराने के लिए बैंकर्स चेक बनाया। लेकिन यह रकम इंडियन बैंक स्थित सृजन के खाते 822726120 में जमा करा दी।

सीबीआई ने जांच में पाया कि जिस तारीख को बैंकर्स चेक बनाया था, उस समय इंडियन बैंक में इस योजना के लिए खाता भी नहीं खुला था। इसमें मनोरमा ने फर्जी पे इन स्लिप भरा था। नाजिर राकेश कुमार और बैंक के अन्य अधिकारियों के सहयोग से फिर 88 लाख और 6.32 करोड़ के दो चेक भी सृजन के खाते में जमा करा दिए गए।
2017 में कोतवाली थाने में दर्ज एफआईआर की जांच में फंसे सिन्हा
सिन्हा की भूमिका कोतवाली थाने में दर्ज केस संख्या 513/2017 जो बाद में सीबीआई के केस संख्या आरसी 17(ए)/2017 स्पेशल केस संख्या 4/2018 की जांच के दौरान केंद्रीय जांच एजेंसी ने उजागर की थी। इस मामले में सिन्हा की ओर से पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम बनाम प्रवर्तन निदेशालय केस का रेफरेंस दिया गया और इसे आधार बनाकर अग्रिम जमानत का अनुरोध किया गया। लेकिन कोर्ट ने इस रेफरेंस के फैक्ट्स को सिन्हा के मामले से भिन्न मानते हुए अर्जी खारिज कर दी।



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