मटिहानी प्रखंड के कसहा दियारा में शनिवार को एनटीपीसी द्वारा 290 एकड़ जमीन अधिग्रहण के विरोध में धरना देने पहुंचे किसानों और पुलिस के बीच जमकर झड़प हुई।जिसमें दोनों तरफ से लगभग 40 लोग घायल हो गए। साथ ही किसानों द्वारा किए गए पथराव में जहां निर्माण कार्य में लगी कंपनी के मशीनों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया गया। एस पौंड का निर्माण करवा रहे सुभाष इंफ्रा इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड का 2 पोपलेंन, 2 जेसीबी, 3 ट्रैक्टर, ऑफिस का कांच व कई कुर्सी को क्षतिग्रस्त कर दिया गया।
किसान औरपुलिस के बीच हुई झड़प के दौरान सीओ व दरोगा के अलावे चकिया ओपी के पुलिस मनोज कुमार, सीओ के चालक धर्मवीर कुमार, कर्मचारी गोपाल नंदन, सिपाही दिलराज महतो व अखिलेश्वर प्रसाद घायल हैं। कसहा दियारा व बेगूसराय जिले के रामदीरी दियारा के सीमा क्षेत्र में एनटीपीसी बरौनी के द्वारा ऐश पौंड का निर्माण चल रहा था।
इस दौरान रामदीरी, जगतपुरा समेत कई गांव के सैकड़ों किसान अपनी पुस्तैनी जमीन को बचाने के लिए पूर्व से निर्धारित धरना-प्रदर्शन के लिए पहुंचे थे, इस दौरान वहां पहले से भारी संख्या में मौजूद पुलिस से नोक-झोंक हो गई जो बाद में रोड़ेबाजी में बदल गया।
रोड़ेबाजी के बाद पुलिस ने किया लाठीचार्ज
भाजपा किसानों के द्वारा रोड़ेबाजी शुरू करने के बाद पुलिस ने लाठी चार्ज कर लोगों को खदेड़ना शुरू कर किया, इस दौरान जगतपुरा के किसान रंजीत सिंह, पंकज कुमार, विजय सिंह रामदीरी 2 भवानंदपुर के दिनेश सिंह समेत कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। इससे आक्रोशित किसानों ने निर्माण स्थल स्थित कार्यालय को निशाना बना उस पर रोड़ेबाजी करना शुरू कर दिया तथा वहां मौजूद सीमेंट में आग लगाने की कोशिश की गई। किसानों ने बताया कि पुलिस हमलोगों को यह कहते हुए रोकने लगी कि यह जमीन विवादित है।यहां धरना देने नही देंगे।
इसी बात को ले किसानों और पुलिस में विवाद हो गया। पुलिस ने लाठी चार्ज किया तो किसानों ने गुस्सा में पत्थर चलाया। पुलिस का कहना है कि पहले किसानों ने ही पत्थर चलाया। घटना की सूचना मिलते ही कांग्रेस नेता अभय कुमार सिंह सार्जन, भाकपा नेता अनिल कुमार अंजान, राजद जिला अध्यक्ष मोहित यादव, रत्नेश कुमार टुल्लू, गोपाल सिंह आदि घटना स्थल पर पहुंच किसानों के साथ धरना पर बैठ गए।
दो जिलों के कारण समन्वय में परेशानी
भाजपा नेता सह सांसद प्रतिनिधि अमरेंद्र कुमार अमर ने कहा कि केन्द्रीय मंत्री गिरिराज सिंह की पहल पर पिछले छह माह से काम रुका हैं, पदाधिकारियों से इस संबंध में लगातार बात की गई, लेकिन दो जिलों के कारण समन्वय में कठिनाई हो रही हैं। भूमि स्वामित्व का विवाद संबंधित पक्षों की वार्ता से ही हल हो सकता है। इसमें लोग राजनीतिक प्रतिस्पर्धा में लगें है, जिससे आम किसानों का नुकसान होगा।
हमारे पूर्वजों की है जमीन : किसान
किसानों ने बताया कि जिस जमीन काे एनटीपीसी कोयला के छाय निस्तारण केलि ए अधिग्रहित कर रही है वह जमीन को मेरे पूर्वज सदियों से जाेतते आए हैं। हमलोग वर्ष 2011 तक इस जमीन की रसीद भी कटाते रहे हैं। इन खेतों में अब भी फसल लहलहा रही है। वहीं सरकार कहती है कि यह जमीन सरकार की है। किसानों का कोई हक नहीं है। इसलिए उसे अधिग्रहित जमीन का मुआवजा भी नहीं दिया जाएगा। इसके विरोध में किसानों ने न्यायालय में मुकदमा भी किया है जो चल रहा है।
इधर सरकार ने उक्त जमीन पर कार्य प्रारंभ कर दिया है जिसके विरोध में उपजाऊ भूमि अधिग्रहण मुक्ति मोर्चा के बैनर तले शनिवार को हमलोग अपने जमीन पर धरना देने जा रहे थे। धरना की सूचना भी बेगूसराय जिला प्रशासन को दे दी थी। वार्ता की अध्यक्षता कर रहे बाढ़ एसडीओ सुमित कुमार ने बताया कि सोमवार को पटना डीएम के नेतृत्व में किसान प्रतिनिधि, जिला प्रशासन व एनटीपीसी बरौनी के अधिकारियों के बीच बैठक होगी।
क्या कहते हैं अधिकारी
एनटीपीसी के पीआरओ दिनकर शर्मा ने बताया कि बिहार सरकार एनटीपीसी को यह जमीन हेंडओवर कर चुकी है और निर्माण को लेकर सरकार को ही निर्णय लेना है, अगर ऐश डाइक का निर्माण नहीं हुआ, तो एनटीपीसी बरौनी नहीं चल पाएगी। एनटीपीसी को चलने से आसपास गांव के किसी न किसी रूप में 75 हजार से एक लाख लोगों का रोजी-रोटी चलती है। एनटीपीसी के बंद होने से हजारों लोगों के रोजगार पर प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष असर पड़ेगा।
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