अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने बिहार माध्यमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा रद्द करने के सरकार के निर्णय को दुर्भाग्यपूर्ण व आत्मघाती कदम बताया। परिषद के विक्की आनंद, जिला प्रमुख शंकर सिंह, जिला संयोजक राहुल सिंह ने कहा कि एसटीईटी परीक्षा की पूरे घटनाक्रम की जांच के लिए एक आंतरिक अध्ययन दल गठित किया था।
अध्ययन दल के रिपोर्ट के अनुसार बीएसईबी द्वारा रिजल्ट प्रकाशित होने के समय अचानक से परीक्षा रद्द किया जाना खुद बीएसईबी, शिक्षा विभाग एवं बिहार सरकार के ऊपर प्रश्नचिन्ह लगाती है। एसटीईटी परीक्षा के लिए जब नोटिफिकेशन निकला तो लगभग चार पन्नों में सारी जानकारी लिखी गई थी। संशय दूर करने के लिए बोर्ड ने ईमेल एवं मोबाइल नम्बर जारी किया था। 28 जनवरी को जब परीक्षा ली गई तो सभी सेंटर पर त्रिस्तरीय जांच की व्यवस्था की गई।
जिस सेंटर पर बहिष्कार हुआ वहां फरवरी में दोबारा परीक्षा ली गई। फरवरी के परीक्षा के बाद किसी छात्र संगठन या परीक्षार्थी के किसी समूह ने परीक्षा का किसी स्तर पर न तो बहिष्कार किया और न ही रद्द करने की मांग की। फिर अचानक से 16 मई को 4 सदस्य टीम के बारे में जानकारी देते हुए परीक्षा को रद्द करने की बात कैसे कही गई।
जबकि परीक्षा समाप्त होने के बाद बोर्ड अध्यक्ष के द्वारा यह साफ तौर पर कहा गया कि ना तो कहीं पर परीक्षा का पर्चा लीक हुआ था और ना ही परीक्षा में किसी भी प्रकार का भ्रष्टाचार हुआ तो फिर क्या मजबूरी आई कि बिहार बोर्ड और बिहार सरकार को अपरिहार्य कारणों से परीक्षा को रद्द करना पड़ा।
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