मार्क बर्टिन. कोरोनावायरस के कारण पैरेंट्स के बीच बच्चों की शिक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। इसके साथ ही माता-पिता बच्चों के बीच बढ़ रहे तनाव, घबराहट, व्यवहार और बधित पढ़ाई को लेकर भी चिंतित हैं। ऐसे में पहले ही पढ़ाई के लिए खास देखभाल वाले बच्चों के माता-पिता पर और भी ज्यादा बोझ आ गया है। इनबच्चों के लिए ऑनलाइन शिक्षण सेवाएं जारी रखना नामुमकिन सा है। इसके अलावा अपने कामों में व्यस्त पैरेंट्स को भी इसमें दखल देने का समय नहीं है।
इन हालातों में पैरेंट्स को अपने बच्चों के भविष्य की चिंता सता रही है। उन्हें लग रहा है कि, अगर स्कूल बंद रहे तो बच्चे की प्रगति या तो रुक जाएगी नहीं तो पीछे चली जाएगी। अगर आपको लग रहा है कि विकास और भावनात्मक रूप से बच्चा प्रभावित हो रहा है तो तुरंत स्कूल पहुंचें, पीडियाट्रीशियन से मिलें और मनोचिकित्सक से बात करें। जो कुछ संभव है उसके प्रति स्पष्ट रहें और शांत रहें। बुनियादी तौर पर देखें तो बच्चे का भावनात्मक स्वास्थ्य ज्यादा जरूरी है। इसलिए अच्छे संबंधों, शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान रखें।
शेड्यूल के फायदे
बच्चे स्ट्रक्चर के लिए बड़ों पर निर्भर होते हैं। एक स्किल सेट एग्जीक्यूटिव फंक्शन में निर्णय लेना और प्लान करना शामिल होता है। जीवन में मैनेजमेंट बनाना इन क्षमताओं पर निर्भर होता है। लेकिन यह क्षमताएं 20 साल की उम्र तक पूरी तरह से विकसित नहीं होती हैं। घर में केवल बड़ों के पास विकसितदिमाग होता है इसलिए बच्चें इन क्षमताओं के लिए उनपर निर्भर होते हैं। एक निर्धारित स्कूल शेड्यूल बच्चे के दिन को उपयोगी बना देता है। यह भावनात्मक रूप से बच्चे के लिए भी जरूरी होता है।
मजबूत प्लान तैयार करें
एक मजबूत प्लान आपके तनाव को कम करने में आपकी मदद करेगा। अपने संसाधनों का उपयोग कर इमोशनल और बिहेवियरल चिंताओं को दूर करें। क्योंकि आपके पास इन चीजों में दखल देने का समय नहीं है। आमतौर पर शुरुआती व्यवहार शिक्षा बड़ों के दखल पर निर्भर करती है। इसका मतलब अगर बच्चा ट्रीटमेंट में भाग नहीं ले पा रहा है, तो भी आप कुछ स्टेप्स ले सकते हैं। अगर पैरेंट्स के पास वक्त है तो ऑटिज्म, एडीएचडी और अपंगता से जूझ रहे बच्चों के लिए कुछ ऑनलाइन सपोर्ट सर्विसेज भी हैं। यह भी पहचानें कि, शुरुआती सीखने वालों को एकेडमिक फ्लुएंसी विकसित करना जरूरी है। जैसे शब्दों को पहचानना और गणित के तथ्यों पर पकड़ बनाना।
बुरे दौर के लिए प्लानिंग करें
यह सही समय है जब आप अपने बच्चों के एकेडमिक प्लान के पतन के बारे में विचार कर सकते हैं। आमतौर पर डेवलपमेंटल अपडेट औरएकेडमिक हस्तक्षेप की प्रक्रिया क्लासरूम और थैरेपिस्ट के फीडबैक पर निर्भर करती है। अभी के लिए पैरेंट्स, स्कूल और सर्विस देने वालों को बेहतर प्लान बनाने के लिए फ्लेक्सिबल रहना चाहिए।
अगर आप बच्चे की शिक्षा और विकास के लिए चिंतित हैं तो नए मूल्यांकन से भी शुरुआत कर सकते हैं। यह प्रक्रिया सोशल डिस्टेंसिंग के कारण मुश्किल है, लेकिन संभव भी है। ज्यादातर विकासशील और शैक्षणिक मूल्यांकन बच्चे के इतिहास और रिपोर्ट्स पर निर्भर करता है। समर्थन और शैक्षणिक हस्तक्षेप हमेशा बच्चे के लिए अच्छा प्लान बनाने और उसेमॉनिटर करने के लिए जरूरी है।
एडीएचडी के लिए
- एडीएचडी से जूझ रहे बच्चों के लिए खासतौर पर ऑर्गेनाइजेशन, टाइम मैनेजमेंट और प्लानिंग करना मुश्किल होता है। दिन की शुरुआत में क्या करना चाहिए इसका अनुमान निगरानी के जरिए लगाएं और जब संभव हो समय समय पर बच्चों के ऑर्गेनाइजेशन की जांच कराएं।
- व्यवहार संबंधी बदलाव आमतौर पर माता-पिता के तैयार किए प्लान पर निर्भर करते हैं। लगातार तारीफ, इनाम और सीमा तय करने से एडीएचडी में सुधार करती हैं और घर पर तनाव को कम करती हैं।
- अच्छी नींद, एक्सरसाइज और सीमित स्क्रीनटाइम एडीएचडी के सुधार में बड़ी भूमिका निभाती हैं। इस वक्त ज्यादातर बच्चे स्क्रीन के सामने ज्यादा वक्त बिता रहे हैं, लेकिन सीमा तय करना बहुत जरूरी है। आप दवाई का भी सहारा ले सकते हैं।
ऑटिज्म के लिए
- व्यवहार चिकित्सा ऑटिज्म का सबसे अच्छा इलाज है, लेकिन इसे घर पर करना थोड़ा कठिन है। यह बच्चे की क्षमता और ऑनलाइन दखल पर भी निर्भर करता है। अगर आप व्यवहार में कोई बड़ा बदलाव देख रहे हैं तो पैरेंट्स को दखल देना चाहिए।
- अगर आप सक्षम हैं तो सोशल स्किल भी समान असर करेगी। आपको एक थैरेपिस्ट की तरह व्यवहार करने की कोई जरूरत नहीं है, लेकिन अगर आप कोई ऐसी सोशल स्किल जानते हैं जो आपके बच्चे के लिए फायदेमंद है तो अच्छा है। आप बच्चे का इलाज कर रही टीम के साथ कॉर्डिनेट कर इसे घर पर शुरू कर सकते हैं।
- ऑटिज्म के इलाज के लिए कम्यूनिकेशन और लैंग्वेज थैरेपी भी अच्छी होती है। आपका बच्चा फिजिकल थैरेपी के साथ-साथ इसे ऑनलाइन कर सकते हैं।
लर्निंग डिसॉर्डर और विकास में देरी के लिए
- शिक्षक और थैरेपिस्ट छोटे समूहों में कई इलाकों में ऑनलाइन निर्देश दे सकते हैं। इन निर्देशों को नियमित होमवर्क और प्रैक्टिसेज के माध्यमम से बढ़ाया भी जा सकता है।
- खासतौर से छोटे बच्चों के लिए कुछ मिनट का फ्लुएंसी वर्क मदद कर सकता है।
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