कन्याकुमारी से 17 मई को दोपहर 1 बजे चली श्रमिक स्पेशल ट्रेन बापूधाम रेलवे स्टेशन पर 68 घंटे बाद 20 मई को सुबह 7 बजे पहुंची। इस दौरान श्रमिकों को कहीं भी भोजन नहीं मिला. भूखे प्यासे उतरने के बाद उन्हें यहां भी दुर्गंध उठता बासी खाना दिया गया। जिसे प्रवासी फेंक कर बस में चढ़ गए।
प्रवासियों के अनुसार जहां भी ट्रेन रुकी थी वहां बस पानी मिला। इसमें पूर्वी व पश्चिम चंपारण के 640 प्रवासी शामिल थे। श्रमिकों ने बताया कि उन्हें कन्याकुमारी में हीं भोजन व पानी मिला। इसके बाद विजयवाड़ा व लखनऊ में एक बिस्किट व ब्रेड मिला। श्रमिकों ने बताया कि 68 घंटे की सफर में सिर्फ रास्ते में सिर्फ एक जगह बिस्कुट व ब्रेड मिला। जब बापूधाम रेलवे स्टेशन पर ट्रेन सुबह पहुंची तो बासी भोजन नसीब हुआ। भूख-प्यास के कारण श्रमिक ट्रेन में छटपटा रहे थे। बेतिया के सतीश कुमार ने बताया कि भोजन का पैकेट खाने के लिए जैसे खोला भोजन से दुर्गन्ध आ रही थी। जिसके कारण खाना को फेंकना पड़ा। बेतिया के बैकुंठवा के श्याम यादव ने बताया कि झांसी के बाद किसी भी स्टेशन पर खाना या पानी नहीं मिला। किसी भी स्टेशन पर कुछ खाने का बिक ही नहीं रहा था।
सभी बसों में नहीं किया गया सोशल डिस्टेंसिंग का पालन
एक तरफ कोरोना वायरस से बचाव के लिए केंद्र व राज्य सरकार लाखों रुपए दाव पर लगाकर श्रमिकों को सोशल डिस्टेंस का पालन करा कर प्रवासी मजदूरों को बुला रही है। लेकिन स्टेशन पर जिला परिवहन विभाग के अधिकारियों के लापरवाही के कारण बसों में सोशल डिस्टेंसिंग का माखौल उड़ रहा है। बस के अंदर से लेकर बस के छत तक श्रमिकों को लादकर लेकर उनके गृह जिला पहुंचाया जा रहा है। श्रमिकों को गृह जिला जाने के लिए स्टेशन पर करना पड़ा 11 घंटे तक इंतजार करना पड़ा।
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